जिसका इन्तिज़ार था वह आ ही गयी जिसको ढूँढ रहा था मैं मिल भी गयी करता क्या क़दमों में दिल रख दिया और कोई नहीं वह है वह है मेरी सोफिया मिल ही गयी मुझको मेरी सोफिया… पहली बार जिसके लिए दिल धड़का जिसस… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: जिसका इन्तिज़ार था वह आ ही गयी जिसको ढूँढ रहा था मैं मिल भी गयी करता क्या क़दमों में दिल रख दिया और को … more →