सोज़ेदिल में कभी कमी ना हो ज़िंदगी चाहे ज़िंदगी ना हो वो मुझे देखते हैं कुछ ऐसे उनकी आँखों में गो नमी ना हो राख को भी टटोलकर देखो आग शायद अभी बुझी ना हो पूछकर फिर से देख लो तो कहीं तर्क़ेमोहब्बत दिल्लगी न… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: सोज़ेदिल में कभी कमी ना हो ज़िंदगी चाहे ज़िंदगी ना हो वो मुझे देखते हैं कुछ ऐसे उनकी आँखों में गो नमी न … more →