विनय wrote 1 year ago: आतिशे-दोज़ख़ का सोज़ है दिल में आहो-फ़ुगाँ खा़मोश है दिल में मैं दीदारे-दिलनशीं को बेताब हूँ क़लक़ इक हनो … more →
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