घर आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापू हमें तुम पर बहुत तरस आता लिखते हुए बीत गए कई बरस पर तुम्हारा नाम कहीं चमक नहीं पाता केवल लिखने से तुम मशहूर नहीं हो सकते देखो लाया हूं मशहूर होने के हजार नुस्खे बताने… more →
***दीपक भारतदीप की हिंदी पत्रिका*** ***Deepak Bharatdeep ki Hindi patrika***ambuj wrote 11 months ago: हर शाम को हम उनका नाम लिया करते हैं दिल के ज़ख्मो को थोड़ा और ताज़ा करते हैं उनकी खुशियों के किस्से … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: चलने को ताज महल भी चल जाता है हिलने को कुतुबमीनार भी हिल जाता है चांद लाकर यहां भेंट किया जाता है ता … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: घर आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापू हमें तुम पर बहुत तरस आता लिखते हुए बीत गए कई बरस पर तुम्हारा नाम क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: वफा अब मुफ्त में नहीं मिलती अगर दाम देने की ताकत हो पास तो बेचने वाले सौदागरो की भीड़ दिखती ओ बाजार … more →