स्कूल मे छुटी हो गई थी और मे अपना सामान उठाकर क्लास से बहार नीकला और बस की और चल दिया. बस मे पहुचकर बाकी विद्यार्थीयो का इंतजार किया. कुछ ही देर मे वो भी आ गए. और चालु हुई हमारी बस. बस का माहोल शांत थ… more →
मेरी दुनियाँउत्कर्ष बेंगाणी wrote 1 year ago: स्कूल मे छुटी हो गई थी और मे अपना सामान उठाकर क्लास से बहार नीकला और बस की और चल दिया. बस मे पहुचकर … more →
उत्कर्ष बेंगाणी wrote 1 year ago: करीबन 6 महीने हो गए है लिखने को. क्यों? मेरी डायरी जो खो गई थी. अब तो पता भी नही चलता की क्या लीखुँ. … more →