स्कूल मे छुटी हो गई थी और मे अपना सामान उठाकर क्लास से बहार नीकला और बस की और चल दिया. बस मे पहुचकर बाकी विद्यार्थीयो का इंतजार किया. कुछ ही देर मे वो भी आ गए. और चालु हुई हमारी बस. बस का माहोल शांत थ… more →
मेरी दुनियाँMANOJ KUMAR wrote 10 hours ago: बच्चे स्कूल पर " गुल्ली " खेलते हुए --हमारे गाँव के बच्चे अभी भी शिक्षा से बंचित हैं ,,,,व … more →
Hemant Patel wrote 1 month ago: इंडिया और चाइना मे कम से कम एक सम्स्या तो आम हॆ – ग्रामीण और शहरी जीवन की असमानता. इसकी एक बेहतरीन झ … more →
K M Mishra wrote 3 months ago: बात उन दिनों की है जब मैं स्कूल में पढ़ा करता था। पढ़ा क्या करता था बस यूं ही जब घर बैठे-बैठे बोर हो ज … more →
योगेन्द्र जोशी wrote 1 year ago: मेरी पत्नी एक प्राथमिक पाठशाला यानी प्राइमरी स्कूल में अध्यापिका हैं । वह और उनकी साथी अध्यापिकाओं क … more →
उत्कर्ष बेंगाणी wrote 1 year ago: स्कूल मे छुटी हो गई थी और मे अपना सामान उठाकर क्लास से बहार नीकला और बस की और चल दिया. बस मे पहुचकर … more →
उत्कर्ष बेंगाणी wrote 1 year ago: करीबन 6 महीने हो गए है लिखने को. क्यों? मेरी डायरी जो खो गई थी. अब तो पता भी नही चलता की क्या लीखुँ. … more →