पति-स्तवनम् नमः कान्ताय सद्-भर्त्रे, शिरशछत्र-स्वरुपिणे। नमो यावत् सौख्यदाय, सर्व-सेव-मयाय च।। नमो ब्रह्म-स्वरुपाय, सती-सत्योद्-भवाय च। नमस्याय प्रपूज्याय, हृदाधाराय ते नमः।। सती-प्राण-स्वरुपाय, सौभाग… more →
यंत्र-मंत्र-तंत्रNidhi KM wrote 7 months ago: हर बार क्यों लक्षमण रेखा खिचाती है? हर बार क्यों अग्नि परीक्षा होती है? जब राम ही नही है आज यहाँ? फि … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: कुछ लोग हैं जो महिलाओं को अपने पुरुषों के अनाचारों के विरुद्ध भड़काते रहते हैं। यह मामला दायर कर दो। … more →
डा. अमर कुमार wrote 10 months ago: पिछली बार.. अनुभवहीनता से इस प्रकार ठोकरें खानी पड़ी । कोई पथ प्रदर्शक तथा सहायक नहीं, जिस से परामर्श … more →
rudrakshanath wrote 1 year ago: दैनिक जीवन के सामान्यतः चलते ही जब हम देखते हैं कि कितना तनाव और आपाधापी है तो फिर समाज की स्त्रियां … more →
aspundir wrote 1 year ago: पति-स्तवनम् नमः कान्ताय सद्-भर्त्रे, शिरशछत्र-स्वरुपिणे। नमो यावत् सौख्यदाय, सर्व-सेव-मयाय च।। नमो ब … more →