आज बहुत दिनों बाद जब पुनः लिखने बैठी हूँ तो सोचा सबसे पहले वह लिखूँ जो गये दिनों मे लिखने का मन तो किया किंतु शब्दों ने साथ नहीं दिया. बीते तीन महीने मेरे लिये एक परीक्षा की तरह बीते हैं. मुझे लगा जैस… more →
चिन्तनअतुल शर्मा wrote 2 years ago: कल इस चिट्ठे को एक वर्ष पूरा हो गया। समय की कमी के कारण इस पोस्ट कल नहीं लिख सका इसलिए चिट्ठे के ज … more →
Nidhi wrote 2 years ago: आज बहुत दिनों बाद जब पुनः लिखने बैठी हूँ तो सोचा सबसे पहले वह लिखूँ जो गये दिनों मे लिखने का मन तो क … more →
Nidhi wrote 3 years ago: यूँ तो शिक्षक दिवस आया और चला गया। हमने मन ही मन अपने शिक्षकों को याद किया। पर लिखा कुछ नहीं। … more →
Nidhi wrote 3 years ago: पिछले कुछ दिन से सोच रहे हैं कि लिखें पर लिख ही नही पाये । जिसके घर का चूल्हा तीन दिन से न जला हो व … more →
Nidhi wrote 3 years ago: यूँ तो लिखने की शुरुआत कविता से ही की थी । पर लगता है कि कविता लिखी नहीं जाती बल्कि अपने आप को लिखात … more →
Nidhi wrote 3 years ago: गतांक से आगे… पिछली कड़ी पर की गयी एक टिप्पणी में अमित ने पूछा कि मैने भूत के किस्से सुने हैं क … more →
Nidhi wrote 3 years ago: पिछले अंक से आगे… अपनी पिछली पोस्ट पढ़ कर लगा कि सात सालों के अनुभव को दो किस्सों मे समेट देना … more →
Nidhi wrote 3 years ago: यूँ तो मैं उन लोगों मे से हूँ जिनके लिये बीता हुआ समय हमेशा आज से बेहतर होता है, यानि जो आज है वह भी … more →