हमारे भीतर रोज अनेक इच्छाएं आकार लेती हैं और हम उन्हें स्थगित करते चलते हैं, न जाने किन दिनों के लिए। हम अपने को दिलासा देने के लिए एक समय तय कर लेते हैं कि अमुक वर्ष में अपनी किसी इच्छा के साथ जीएंगे… more →
उलटवांसीAmarjeet Singh wrote 1 year ago: हमारे भीतर रोज अनेक इच्छाएं आकार लेती हैं और हम उन्हें स्थगित करते चलते हैं, न जाने किन दिनों के लिए … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: पोता विदेश से गोरी मेम को ब्याह्कर घर लाया और अपनी दादी से मिलवाया बहु ने अपना मूँह बिचकाया और उसे … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: मन्त्री जी ने मीटिंग में अपने सचिव से कहा’- इस बार के वार्षिक पुरस्कार के लिये ऐसे लेखक का न … more →