मैंने आँखों को लहू का समन्दर और दिल को दस्तो-सहरा बनाया ‘नज़र’ को अय्यार पे… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय प्रजापति wrote 6 months ago: मैंने आँखों को लहू का समन्दर और दिल को … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: प्यार ज़िन्दगी को बदल देता है उड़ जाये … more →