कब कहाँ रुकें, कब तक चलें ठहर जायें जहाँ दो पल के लिए वह मंज़िल है कहाँ? तुम जहाँ कहानियाँ कहती हों वादियाँ हर लम्हा रोशन हो प्यार से जिसको चाहें उसका दीदार मिले कब कहाँ रुकें, कब तक चलें ठहर जायें जहा… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: कब कहाँ रुकें, कब तक चलें ठहर जायें जहाँ दो पल के लिए वह मंज़िल है कहाँ? तुम जहाँ कहानियाँ कहती हों व … more →
विनय wrote 1 year ago: किस राह को चल रहे थे किस राह को हम चल दिये, उनसे प्यार लिए हम चले इक नये सफ़र पर, लुटा दिया सारा जो क … more →
विनय wrote 1 year ago: ऐ दिल वहाँ चल जहाँ रहते हैं वह उनके बिना कितने पल गुज़ारे हैं खोये-खोये सारे वह बीते नज़ारें हैं हाथों … more →
विनय wrote 1 year ago: गुज़रे जो मौसम हैं वह भी आयेंगे तेरे नाम हमने जिन पर लिखे थे वह पत्ते जब हमें वापस मिल जायेंगे नया सफ़ … more →
विनय wrote 1 year ago: थकने लगी है मोहब्बत की शाम सफ़र के राही को न मिला है मक़ाम बुझने लगी है मोहब्बत की रोशनी रात का राही ह … more →
विनय wrote 1 year ago: गिर जायेगा इस बरसात में घर तुम हो उधर हम हैं इधर जंगल ही जंगल है सब वीराना-सा जिस सिम्त दौड़ती है नज़ … more →
विनय wrote 1 year ago: सिवा इससे जो भी हो, करेंगे महब्बत तुझ बिन किसी से न करेंगे क़ज़ा ने भी हमसे ताक़त आज़माई की तुझ बिन हम ज … more →
विनय wrote 2 years ago: हर गली हर कूचा दर-ब-दर ढूँढ़ते हैं हम अपनी दुआ में असर ढूँढ़ते हैं तुम देखकर हँसते हो मुझे और हम तेर … more →