विनय wrote 1 year ago: अश्क से पहले आँच उठती है जब भी तुझपे आँख टिकती है बाटे हुए सब वक़्त के धागे पर उनमें अब गिरह दिखती है … more →
विनय wrote 1 year ago: सदियाँ कटता रहूँगा वक़्त गुज़ारता रहूँगा तुम जो हँसते रहो मैं भी हँसता रहूँगा.. शायिर: विनय प्रजापति ‘ … more →