रचना: नवाब बहादुर शाह ज़फ़र स्वर: हबीब वली मोहम्मद शमशीर बरहना माँग ग़ज़ब बालों की महक फिर वैसी है जूड़े की गुंधावट बहर-ए-ख़ुदा ज़ुल्फ़ों की लटक फिर वैसी है (शमशीर== तलवार, बरहना == नंगी/खाली, बहर-ए-ख़ुदा == ख़… more →
निंदा पुराणअंकुर वर्मा wrote 1 year ago: रचना: नवाब बहादुर शाह ज़फ़र स्वर: हबीब वली मोहम्मद शमशीर बरहना माँग ग़ज़ब बालों की महक फिर वैसी है जूड़े … more →
अंकुर वर्मा wrote 1 year ago: रचना: नवाब बहादुर शाह ज़फ़र स्वर: मोहम्मद रफ़ी/हबीब वली मोहम्मद न किसी की आँख का नूर हूँ, न किसी के दि … more →
अंकुर वर्मा wrote 1 year ago: शायर: नवाब बहादुर शाह ज़फ़र स्वर: हबीब वली मोहम्मद लगता नहीं है दिल मेरा उजड़े दयार में किसकी बनी है आल … more →
अंकुर वर्मा wrote 1 year ago: रचना: क़मर जलालवी स्वर: हबीब वली मोहम्मद कब मेरा नशेमन एहल-ए-चमन गुलशन में गवारा करते हैं ग़ुन्चे अपनी … more →