ताउम्र मैं उसका नाम करता रहा ! पर वो मुझको बदनाम करता रहा !! इक अर्सा बीत गया मैंने सहर नहीं देखी, मेरी हर सुबह को वो शाम करता रहा ! उसके सुकुं के लिये मैं जागा रातभर, वो मेरी नींदें मगर हराम करता रहा… more →
दिल की ज़मीं परwrote 1 month ago: आदमी क्या खाये और क्या पीये ? मंहगाई सुरसा चाची के मुंह से भी बड़ा मुंह फाड़ती जा रही है । इसके मुंह स … more →
wrote 6 months ago: ताउम्र मैं उसका नाम करता रहा ! पर वो मुझको बदनाम करता रहा !! इक अर्सा बीत गया मैंने सहर नहीं देखी, म … more →