ये कौन आया रेगिस्तान मे हरियाली सी छा गई, उसकी कातिल अदाएँ मेरे दिल-ओ-दिमाग पे छा गई, कही जोश-ऐ-जूनून मे कुछ कर न बैठु मैं, ऐ दोस्त इश्क-ऐ-जूनून मे सब कुछ कर न बैठु मैं, … more →
मेरे दिल ने...दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हरियाली के कायदे कभी रेगिस्तान में नहीं चलते। हरी दूब में चलते हों जो पांव रेत की धरती पर बुरी तरह ज … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: ये कौन आया रेगिस्तान मे हरियाली सी छा गई, उसकी कातिल अदाएँ मेरे दिल-ओ-दिमाग पे छा गई, कही जोश-ऐ-जूनू … more →