रात आधी खींच कर मेरी हथेली एक उंगली से लिखा था प्यार तुमने। फ़ासला था कुछ हमारे बिस्तरों में और चारों ओर दुनिया सो रही थी। तारिकाऐं ही गगन की जानती हैं जो दशा दिल की तुम्हारे हो रही थी। मैं तुम्हारे प… more →
कारवाँ गुज़र गया, गुबार देखते रहे!दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: हिंदी भाषा के महान कवि हरिबंशराय बच्चन ने मधुशाला लिखी थी। अनेक लोगों ने उसे नहीं पढ़ा। कई लोग ऐसे ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: हिंदी भाषा के महान कवि हरिबंशराय बच्चन ने मधुशाला लिखी थी। अनेक लोगों ने उसे नहीं पढ़ा। कई लोग ऐसे ह … more →
Satish Chandra satyarthi wrote 1 year ago: पूर्व चलने के बटोही, बाट की पहचान कर ले पुस्तकों में है नहीं छापी गई इसकी कहानी हाल इसका ग्यात होता … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: रात आधी खींच कर मेरी हथेली एक उंगली से लिखा था प्यार तुमने। फ़ासला था कुछ हमारे बिस्तरों में और चारो … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: मैं कब कहता हूं जग मेरी दुर्धर गति के अनुकूल बने, मैं कब कहता हूं जीवन-मरू नंदन-कानन का फूल बने ? का … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: इस पार, प्रिये मधु है तुम हो, उस पार न जाने क्या होगा! यह चाँद उदित होकर नभ में कुछ ताप मिटाता जीवन … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: सन्नाटा वसुधा पर छाया, नभ में हमनें कान लगाया, फ़िर भी अगणित कंठो का यह राग नहीं हम सुन पाते हैं कहत … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: मानव पर जगती का शासन, जगती पर संसृति का बंधन, संसृति को भी और किसी के प्रतिबंधो में रहना होगा! साथी, … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: संस्रिति के विस्त्रित सागर मे सपनो कि नौका के अंदर दुख सुख कि लहरों मे उठ गिर बहता जाता, मैं सो जाता … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। नन्हीं चींटी जब दाना लेकर … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: क्या करूं संवेदना लेकर तुम्हारी? क्या करूं? मैं दुखी जब-जब हुआ संवेदना तुमने दिखाई, मैं कृतज्ञ हुआ ह … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ! वृक्ष हों भले खड़े, हो घने, हो बड़े, एक पत्र-छॉंह भी मॉंग मत, मॉंग मत, … more →
Rewa Smriti wrote 2 years ago: जीवन में एक सितारा था माना वह बेहद प्यारा था वह डूब गया तो डूब गया अम्बर के आनन को देखो कितने इसके त … more →
Rewa Smriti wrote 2 years ago: टूट गई मरकत की प्याली, लुप्त हुई मदिरा की लाली, मेरा व्याकुल मन बहलानेवाले अब सामान कहाँ हैं! अब वे … more →
Rewa Smriti wrote 2 years ago: आ रही रवि की सवारी। नव-किरण का रथ सजा है, कलि-कुसुम से पथ सजा है, बादलों-से अनुचरों ने स्वर्ण की पो … more →
Rewa Smriti wrote 2 years ago: गीले बादल, पीले रजकण, सूखे पत्ते, रूखे तृण घन लेकर चलता करता ‘हरहर’–इसका गान समझ प … more →
Rewa Smriti wrote 2 years ago: अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ! वृक्ष हों भले खड़े, हो घने, हो बड़े, एक पत्र-छॉंह भी मॉंग मत, मॉंग मत, … more →
Rewa Smriti wrote 2 years ago: पूर्व चलने के बटोही बाट की पहचान कर ले। पुस्तकों में है नहीं छापी गई इसकी कहानी हाल इसका ज्ञात होता … more →
Rewa Smriti wrote 2 years ago: है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है ? कल्पना के हाथ से कमनीय जो मंदिर बना था, भावना के हाथ ने जिसम … more →