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Blogs about: हरिवंशराय बच्चन

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मधुशाला पसंद है पर मद्यपान नहीं -व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: हिंदी भाषा के महान कवि हरिबंशराय बच्चन ने मधुशाला लिखी थी। अनेक लोगों ने उसे नहीं पढ़ा। कई लोग ऐसे ह … more →

Tags: आलेख, हिंदी, चिन्तन, व्यंग्य, web dunia, web bhaskar, web navabharat, कथा साहित्य, अभिव्यक्ति

सभी पियक्कड़ हो जाते, जो पहुंचे मधुशाला-व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: हिंदी भाषा के महान कवि हरिबंशराय बच्चन ने मधुशाला लिखी थी। अनेक लोगों ने उसे नहीं पढ़ा। कई लोग ऐसे ह … more →

Tags: hasya -vyangya, hasya vyang, vyangya, aritile in hindi, हिंदी आलेख, hindi article, Hindi writing, hindi kavita, vyangya kavita

पूर्व चलने के बटोही, बाट की पहचान कर ले

Satish Chandra satyarthi wrote 1 year ago: पूर्व चलने के बटोही, बाट की पहचान कर ले पुस्तकों में है नहीं छापी गई इसकी कहानी हाल इसका ग्यात होता … more →

Tags: कविता, पूर्व चलने के बटोही, बाट की पहचान कर ले, bachchan, Bachhan, Poem

रात आधी खींच कर मेरी हथेली4 comments

Rewa Smriti wrote 1 year ago: रात आधी खींच कर मेरी हथेली एक उंगली से लिखा था प्यार तुमने। फ़ासला था कुछ हमारे बिस्तरों में और चारो … more →

Tags: कलम आज उनकी जय बोल

मैंने आहुति बन कर देखा1 comment

Rewa Smriti wrote 1 year ago: मैं कब कहता हूं जग मेरी दुर्धर गति के अनुकूल बने, मैं कब कहता हूं जीवन-मरू नंदन-कानन का फूल बने ? का … more →

Tags: कलम आज उनकी जय बोल

उस पार न जाने क्या होगा2 comments

Rewa Smriti wrote 1 year ago: इस पार, प्रिये मधु है तुम हो, उस पार न जाने क्या होगा! यह चाँद उदित होकर नभ में कुछ ताप मिटाता जीवन … more →

Tags: कलम आज उनकी जय बोल

कहते हैं तारे गाते हैं

Rewa Smriti wrote 1 year ago: सन्नाटा वसुधा पर छाया, नभ में हमनें कान लगाया, फ़िर भी अगणित कंठो का यह राग नहीं हम सुन पाते हैं कहत … more →

Tags: कलम आज उनकी जय बोल

साथी, सब कुछ सहना होगा

Rewa Smriti wrote 1 year ago: मानव पर जगती का शासन, जगती पर संसृति का बंधन, संसृति को भी और किसी के प्रतिबंधो में रहना होगा! साथी, … more →

Tags: कलम आज उनकी जय बोल

को‌ई गाता मैं सो जाता

Rewa Smriti wrote 1 year ago: संस्रिति के विस्त्रित सागर मे सपनो कि नौका के अंदर दुख सुख कि लहरों मे उठ गिर बहता जाता, मैं सो जाता … more →

Tags: कलम आज उनकी जय बोल

कोशिश करने वालों की4 comments

Rewa Smriti wrote 1 year ago: लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। नन्हीं चींटी जब दाना लेकर … more →

Tags: कलम आज उनकी जय बोल

क्या करूं संवेदना लेकर तुम्हारी6 comments

Rewa Smriti wrote 1 year ago: क्या करूं संवेदना लेकर तुम्हारी? क्या करूं? मैं दुखी जब-जब हुआ संवेदना तुमने दिखाई, मैं कृतज्ञ हुआ ह … more →

Tags: कलम आज उनकी जय बोल

अग्नि पथ 2 comments

Rewa Smriti wrote 1 year ago: अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ! वृक्ष हों भले खड़े, हो घने, हो बड़े, एक पत्र-छॉंह भी मॉंग मत, मॉंग मत, … more →

Tags: कलम आज उनकी जय बोल

जो बीत गई सो बात गयी

Rewa Smriti wrote 2 years ago: जीवन में एक सितारा था माना वह बेहद प्यारा था वह डूब गया तो डूब गया अम्बर के आनन को देखो कितने इसके त … more →

अब वे मेरे गान कहाँ हैं

Rewa Smriti wrote 2 years ago: टूट गई मरकत की प्याली, लुप्त हुई मदिरा की लाली, मेरा व्याकुल मन बहलानेवाले अब सामान कहाँ हैं! अब वे … more →

आ रही रवि की सवारी

Rewa Smriti wrote 2 years ago: आ रही रवि की सवारी। नव-किरण का रथ सजा है, कलि-कुसुम से पथ सजा है, बादलों-से अनुचरों ने स्‍वर्ण की पो … more →

तुम तूफान समझ पाओगे ?

Rewa Smriti wrote 2 years ago: गीले बादल, पीले रजकण, सूखे पत्ते, रूखे तृण घन लेकर चलता करता ‘हरहर’–इसका गान समझ प … more →

अग्नि पथ

Rewa Smriti wrote 2 years ago: अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ! वृक्ष हों भले खड़े, हो घने, हो बड़े, एक पत्र-छॉंह भी मॉंग मत, मॉंग मत, … more →

पथ की पहचान

Rewa Smriti wrote 2 years ago: पूर्व चलने के बटोही बाट की पहचान कर ले। पुस्तकों में है नहीं छापी गई इसकी कहानी हाल इसका ज्ञात होता … more →

अँधेरे का दीपक

Rewa Smriti wrote 2 years ago: है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है ? कल्पना के हाथ से कमनीय जो मंदिर बना था, भावना के हाथ ने जिसम … more →


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