अमराई की छाँव सी सपनों के गाँव सा , जैसे हो सीप में मोती समंदर में नाव सा , कोई गीत गाना चाहता हूँ तुमको सुनाना चाहता हूँ , खुशबु हो जिसमें फैली सोंधी सी माटी की छाँव हो जिसपर पसरी अरहर की टाटी सी , ऐ… more →
vikash wrote 2 years ago: अमराई की छाँव सी सपनों के गाँव सा , जैसे हो सीप में मोती समंदर में नाव सा , कोई गीत गाना चाहता हूँ त … more →
Tags: कविता
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