विनय wrote 1 year ago: बोल तुझे इक हर्फ़ में कैसे लिख दूँ तस्वीर नहीं बनती कभी हर्फ़ों से… तू रोशनी और यह तन्हाई अंधेरा … more →
विनय wrote 1 year ago: न कोई शिकायत है तुझसे न कोई गिला है तुम अपने हसीं लबों से हर्फ़ छुओ न छुओ कम-स-कम बाहम निगाहों में गु … more →
विनय wrote 1 year ago: बा-क़ायदा हर्फ़ों में तेरी तस्वीर लिखी है जितनी भी सीखी है मोहब्बत’ तुमसे सीखी है तेरा नाम मेरी … more →
विनय wrote 1 year ago: हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों से अब बात नहीं बनती है तेरी यादों से बोल तुझे इक हर्फ़ में कैसे … more →
विनय wrote 2 years ago: एक पानी में भीगी हुई किताब जाने किसने? सूखने के लिए रख दी है धूप में जैसे जैसे नमी भाप बनती है पन्ने … more →