दर्द देके वे हमें खुद ही दवा देते हैं, रूठ जाने पे हमें खुद ही मना लेते हैं। मेरी जो नाव है पतवार उसमें है ही नहीं, डूब जाने पे हमें खुद ही बचा लेते हैं। होगा अन्ज़ाम-ए-मोहब्बत क्या मालूम न था, देके आव… more →
अनुभूति कलशramadwivedi wrote 6 months ago: दर्द देके वे हमें खुद ही दवा देते हैं, रूठ जाने पे हमें खुद ही मना लेते हैं। मेरी जो नाव है पतवार उस … more →