Blogs about: हवा
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खिली-खिली महकी बहारें हैं
खिली-खिली महकी बहारें हैं झीलों पर बहते शिकारें हैं ठण्डी-ठण्डी सौंधी हवाएँ … more »
तख़लीक़-ए-नज़र
खिली-खिली महकी बहारें हैं
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विनय प्रजापति wrote 1 week ago: खिली-खिली महकी बहारें हैं झीलों पर बहत … more »
हवा
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kmuskan wrote 2 weeks ago: बहते- बहते जब थक गई हवा बेचारी तो आराम क … more »
मैं हूँ चाँद है तुम भी होगी कहीं
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: मैं हूँ, चाँद है, तुम भी होगी कहीं मैं द … more »
तेरी अदाओं पर मैं फ़िदा
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विनय प्रजापति wrote 3 months ago: साहिबा, साहिबा, साहिबा तेरी अदाओं पर म … more »
कोई आया है जाने के बाद कब्र पर
विनय प्रजापति wrote 3 months ago: कोई आया है जाने के बाद क़ब्र पर वह गया है … more »
यादों का सागर
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: यादों का सागर गहरा है उसमें डूब जाऊँ त … more »
बारिश जैसी हो तुम
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: खिली हुई शाम की बिखरी हुई धूप में बारि … more »
