वह मुझसे बहुत नफ़रत करता है जाने सही करता है या ग़लत करता है वह मुझे नहीं चाहता, जानता हूँ मैं दिल फिर भी उसकी हसरत करता है उसने दिल तोड़ दिया है मेरा मगर दिल है कि उसको मग़्फ़रत* करता है वह चाहता है न … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 4 months ago: वह मुझसे बहुत नफ़रत करता है जाने सही करता है या ग़लत करता है वह मुझे नहीं चाहता, जानता हूँ मैं दिल फि … more →
विनय wrote 5 months ago: ख़ाब सब ख़ाब हैं आँखों में बिखरे हुए दिल के कोने-कोने तक छितरे हुए वह अब कहाँ बाक़ी जो था मुझमें मैं … more →
विनय wrote 1 year ago: उम्मीद जागी है इक बार फिर तुम्हें पाने की बचाये ख़ुदा! नज़र न लग जाये ज़माने की तेरी जुस्त-जू को न मिट … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: गम मुझे हसरत मुझे वहशत मुझे सौदा मुझे, एक दिल देकर खुदा ने दे दिया क्या क्या मुझे, ये नमाज-ऐ-इश्क है … more →
विनय wrote 1 year ago: रोज़ सपनों में आता है इन रातों में जगाता है मैं क्यों न जानूँ उसको मैं न पहचानूँ उसको वह मुझसे अजनबी … more →
विनय wrote 1 year ago: नामंज़ूर थी पेशकश तुम्हें दिल की कैसे दिखाऊँ तुम्हें उल्फ़त दिल की मजरूह तेरे प्यार ने मुझको किया देख … more →
विनय wrote 1 year ago: नज़र बचते बचाते लड़ ही गयी मय उन आँखों की हमें चढ़ ही गयी पूछो ज़रा गुलपोश से वह कहाँ है आज … more →
विनय wrote 1 year ago: हमने अबस की आरज़ू छोड़ दी तुमको पाने की जुस्तजू छोड़ दी चाक़ जिगर को गरेबाँ में छिपाके हमने हसरते-रफ़ू … more →