विनय wrote 1 year ago: न कोई शिकायत है तुझसे न कोई गिला है तुम अपने हसीं लबों से हर्फ़ छुओ न छुओ कम-स-कम बाहम निगाहों में गु … more →
विनय wrote 1 year ago: एक दोस्त मेरा भी हो एक यार मेरा भी हो जिसकी बाँहों में मुझे मिल जाये ज़िन्दगी जो झूठ-मूठ रूठ के सताये … more →
विनय wrote 1 year ago: इश्क़ सुना है हमने बहुत ज़रा करके तो देखें मिल जाये कोई कमसिन हसीना उसपे मरके तो देखें हाए रे हाए, हाए … more →
विनय wrote 1 year ago: वह कब आयेगी जो मुझे चाहेगी जिसका इंतिज़ार करता हूँ यारा जिसके लिए फिरता हूँ मारा-मारा वह कब आयेगी जो … more →
विनय wrote 1 year ago: वह सिर्फ़ मेरा है मेरा ही रहेगा जिस दिन भी पुकारा उसने मुझे मेरे मद्यए-मुक़ाबिल के सर मौत का सेहरा होग … more →
विनय wrote 1 year ago: तेरी चुप निगाहें व शर्मायी नज़रें तेरे प्यार का तोहफ़ा हैं, मेरे लिए एक बार तो कुछ कह दे सनम तू एक बार … more →