विनय wrote 9 months ago: मेरी मोहब्बत को समझते हो तुम ग़लत, ग़लत नहीं है तुमको चाहा है मैंने अगर इसमें कुछ ग़लत नहीं है दिखा … more →
विनय wrote 1 year ago: एक दोस्त मेरा भी हो एक यार मेरा भी हो जिसकी बाँहों में मुझे मिल जाये ज़िन्दगी जो झूठ-मूठ रूठ के सताये … more →
विनय wrote 1 year ago: यह कैसा लम्हा है यह कैसा एहसास है तू पलकों में क़ैद है दिल के पास है क्या देखूँ तेरे सिवा क्या चाहूँ … more →
विनय wrote 1 year ago: तन्हाई यूँ ढूँढ़ती है मुझे जैसे मेरी सदा तुम्हें जो दीवारें ख़ुद-ब-ख़ुद गिरती हैं मैं कैसे चुनावाऊँ … more →
विनय wrote 1 year ago: गुनचे चाँदनी देखकर मुस्कुराने लगे महक उठी रिदा यह चाँदनी की… शबनमी रात और भी हसीन हो गयी है शा … more →
विनय wrote 1 year ago: जिसकी यादों में गुज़ारता हूँ मैं सुबह-शाम मंज़िल वह मेरी वह मेरा आख़िरी मुक़ाम वह रंगीन शाम थी शाम वह ग … more →
विनय wrote 1 year ago: मीठी-मीठी बातें वह शबनमी रातें सब याद हैं हमें वह रस्ते वह रिश्ते जो हमने क़ायम किये थे वादे जो हमने … more →
विनय wrote 2 years ago: मैं खा़क़सार था उसने मुझको माटी समझा मुझे उम्मीद रही वो मुझको सोने की तरह छूकर देखेगा… उसने कुछ … more →
विनय wrote 2 years ago: कल की रात बहुत हसीन थी आँखों में उतर आये थे महके हुए ख़्वाब… पहले तो हम चराग़ों के नूर में बैठे … more →