राम-लखन, ऋषि-अनुसरण, घूमें वनन॥ कुटी निहार, औ’ आश्रम विशाल। क्यूँ सुनसान? ऋषि उवाच- ऋषिमहान, थे ”गौतम’ सुनाम। यहाँ निवास॥ पत्नी अहल्या, तन्वंगी सी यौवना, अतृप्त मना॥ प्रवेश किया, इंद्र ने ऋषि भेष । दे… more →
पसंदप्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: राम-लखन, ऋषि-अनुसरण, घूमें वनन॥ कुटी निहार, औ’ आश्रम विशाल। क्यूँ सुनसान? ऋषि उवाच- ऋषिमहान, थे ”गौत … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: सूर्यवंशस्य चारों भाई महान कीर्ति-प्रसार॥ अवध-जन पाकर युवराज हर्षें अपार॥ विश्वामित्रजी ऋषि-तपस्वी य … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: अयोध्या राज। चक्रवर्ती राजन। वृद्ध ह्वै जाएं।। कौशल राज, सुतविहीन हाय! भए उदास॥ कीन तपस्या, मिले ये … more →