कुछ धृष्टता की है जो मेरे दूसरे ब्लॉग मन की बात पर पढ़ी जा सकती है। बहुत दिनों से लिख रही हूँ और सोच रही हूँ कि प्रकाशित कर दूँ पर जब हो जाए तभी ठीक है। ( वहाँ मैं अपनी सोच ही लिखूंगी। मेरे विचार में ग… more →
पसंदप्रेमलता पांडे wrote 1 month ago: कुछ धृष्टता की है जो मेरे दूसरे ब्लॉग मन की बात पर पढ़ी जा सकती है। बहुत दिनों से लिख रही हूँ और सोच … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: जय जननी, जय शक्तिदायिनी, नवदुर्गा माँ! १ जय अपर्णा! हिमालय तनया, शैलपुत्री माँ! २ जय भवानी, जय ब्र … more →
mehhekk wrote 1 year ago: सुबह की पायल खनकते ही,निशा की गोद से उठकर हम अक्सर उनकी गोद में समा जाते है | बिन कहे ही वो कुछ ऐसी … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: हाथी निकल गया, बस पूंछ की नोक बाक़ी है। साल बीत गया बस दो दिन बीतने बाक़ी हैं। यह इस साल की सबसे बाद व … more →
mehhekk wrote 1 year ago: हाइकू-गूँज 1.परबतो से टकराई गूँज उठी चारो दिशा में आवाज़ तुम्हारी 2.अख़बार में हर दिन गूंजते है दुनि … more →
mehhekk wrote 1 year ago: हाइकू- नारी 1. ममता से भरी अन्नपूर्णा कहलाती है जन्मदात्रि 2. जिसके बिना सारा जग सुना सु … more →
mehhekk wrote 1 year ago: हाइकू – सवेरा 1. पंछीयो की किलबिल सूरज निकलते ही घरौंदा छोड़े 2. चाँद छुप गया चँदन … more →
mehhekk wrote 1 year ago: हाइकू- प्रकृति 1.बहती हवाए लहराते हरेभरे खेत … more →
mehhekk wrote 1 year ago: हिन्दी में हाइकू लिखने का हमारा ये पहला प्रयास है| हाइकू – समय 1. रोकना चाहती हूँ … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: कन्हैया जन्मे त्रिभुवन हरषे पुष्प बरसे। भादौं की रात, कृष्ण-पक्ष अष्टमी, रोहिणीचाल। घिरा तिमिर, बादल … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: १ गुलमोहर दहके संग लेके! अमलतास। २ विघ्नबेलिया चहुँ ओर बहके, क्या तरुणाई! ३ अरी कनेर! क्यों न सकुचाय … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: १ पसीना बहा, अट्टालिका उठायीं, मालिक कौन? २ श्रम पड़ा है, श्रमजीवी खड़ा है, मशीनी युग! ३ समान जन, … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: १ ग्वालिन आयी। लाला होरी मचायी। खूब भिगायी॥ २ हाहा … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: कदम्ब छांव। मारे होली के दांव। ब्रज के गांव॥ नंद-यशोदा। ला … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: १ ले टेसू फूल यमुना जी के कूल, भीगे दुकूल॥ २ वृषभानुजा खेलें होली आ तो जा, ना दे यूं सजा॥ ३ क्यों … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: बसंत ऋतु का स्वागत है। बसंत को ऋतुओं का राजा अर्थात सर्वश्रेष्ठ ऋतु माना गया है। इस समय पंच-तत्त्व अ … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 years ago: श्रावण-मास शुक्ल-पक्ष पूर्णिमा रक्षाबंधन। बहिन-भाई राखी रोली चावल मुँह मिठाई। राखियाँ सोहें भ्राता-भ … more →