सुबह से ले के शाम तक, जूतों से ले के गेहूं- दाल तक, सब खरीदते-बेचते हैं ठाठ में भीड़ भरी इतवार की हाट में । वहां चने भी हैं और खिलौने लकड़ी के, मई मे जहां लगते हैं ठेले ककडी़ के, सिक रहीं हैं मूंगफलीयां… more →
स्याह इंद्रधनुष और चाँदनी रातेंGrey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष wrote 3 months ago: सुबह से ले के शाम तक, जूतों से ले के गेहूं- दाल तक, सब खरीदते-बेचते हैं ठाठ में भीड़ भरी इतवार की हाट … more →