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Blogs about: हाथ

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वे निष्प्राण कैसे हो सकते हैं - सर्वेश्वर दयाल सक्सेना6 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 6 months ago: वे निष्प्राण कैसे हो सकते हैं – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ( a kavita poster by ravi kumar, rawatb … more →

Tags: कविता-पोस्टर, सर्वेश्वर दयाल सक्स, निष्प्राण

भीगी हुई आँखों में तस्वीर तुम्हारी है19 comments

विनय wrote 10 months ago: भीगी हुई आँखों में तस्वीर तुम्हारी है रूठी हुई हमसे तक़दीर हमारी है मैं दिवाना राहे-इश्क़ का मुसाफ़िर ह … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, Love, eyes, प्यार, तस्वीर, आँखें, राह, ज़ंजीर

रातभर चाँद देखा किये15 comments

विनय wrote 11 months ago: रातभर चाँद देखा किये माज़ी में उड़ रहीं थीं तेरी यादें समेटा किये रातभर चाँद देखा किये कभी हाथ से ढका … more →

Tags: मेरा गीत, चाँद, इश्क़, Love, Reminisce, Moment, तन्हाई, प्यार, याद

तन्हाई में भी हम दोनों साथ हैं12 comments

विनय wrote 1 year ago: तन्हाई में भी हम दोनों साथ हैं यूँ लगता है मानो हाथों में हाथ हैं वह पहली शाम जब देखा था तुम्हें मैं … more →

Tags: मेरा गीत, Adore, अन्जान, इश्क़, चाँद, जज़्बात, झलक, तन्हाई, पहर

तुम आये क्यों जब तुम्हें जाना ही था6 comments

विनय wrote 1 year ago: तुम आये क्यों जब तुम्हें जाना ही था मुझसे दूर जाकर मुझे भुलाना ही था बदली-बदली फ़िज़ा में कुछ अपना लगा … more →

Tags: मेरा गीत, इश्क़, NEED, Love, मौसम, प्यार, फ़िज़ा, नाम, मोहब्बत

नन्हें नन्हें हाथ लिए...4 comments

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: नन्हें नन्हें हाथ लिए, चेहरों पे मुस्कान दिए, देखो चला आता है कोई, नाम पूछो तो न बतलाये, मंद मंद ये … more →

Tags: अमरजीत सिंह, amar, amarjeet, अमर, अमरजीत, amarjeet singh, नन्हें, मुस्कान, खुशियाँ

जैसे-तैसे निभाते हैं

विनय wrote 1 year ago: जैसे-तैसे निभाते हैं प्यार करके पछताते हैं सच्चे-झूठे सपने तेरे रातों की नींदें उड़ाते हैं दो किनारे … more →

Tags: मेरा गीत, उम्मीद, इश्क़, लोग, Love, प्यार, मोहब्बत, रात, सपना

दिल लगा बहार में, हाथ में आई खिज़ां

Rohit Jain wrote 1 year ago: दिल लगा बहार में, हाथ में आई खिज़ां इश्क़-ए-ख़ुदा की आस थी हो गया इश्क़-ए-बुतां इक वक़्त था के हर तरफ़ अपन … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Oct 2007, में, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

हाथ कुछ आया नहीं बेरुखी के सिवा

Rohit Jain wrote 1 year ago: हाथ कुछ आया नहीं बेरुखी के सिवा वो और कुछ नहीं था एक अजनबी के सिवा ना जफ़ाएं ना तक़ाज़े ना बेरुखी ना दग … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Mar 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

तख़लीक़ हुआ है [ver. 2.0]

विनय wrote 2 years ago: मेरे ही हाथों में टूटा है दम मेरा तेरे ही स्पर्श से तख़लीक़ हुआ है यह ‘विनय’… नया जन्म हुआ है त … more →

Tags: मेरी नज़्म, इश्क़, तख़लीक़, Love, प्यार, क़िस्मत, मोहब्बत, Destiny, Fate

तख़लीक़ हुआ है यह विनय

विनय wrote 2 years ago: मेरे ही हाथों में टूटा है दम मेरा, तेरे ही स्पर्श से तख़लीक़ हुआ है यह ‘विनय’ अभी-अभी मेर … more →

Tags: मेरी नज़्म, हासिल, इश्क़, तख़लीक़, Love, प्यार, क़िस्मत, मुक़ाम, मोहब्बत

एक अधूरी ख़ाहिश लिए

विनय wrote 2 years ago: एक अधूरी ख़ाहिश लिए मैं भटक रहा हूँ दर-ब-दर, सुनसान ख़ाली सड़कों पर अँधेरा ही अँधेरा है, इन अँधेरों … more →

Tags: मेरी नज़्म, इश्क़, Love, तन्हाई, प्यार, मोहब्बत, ख़ाहिश, Solitude, desire


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