इश्क़ क्या हमको मारेगा, हम इश्क़ को मारेंगे अब तलक क्या हारे हैं उससे, जो अब हारेंगे जाओ कह दो शायरे-मुक़ाबिल से हम भी मैदाँ में हैं वह क्या कहेगा शे’र, हम ज़बाने-लहू को तराशेंगे शायिर: विनय प्रजापत… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: इश्क़ क्या हमको मारेगा, हम इश्क़ को मारेंगे अब तलक क्या हारे हैं उससे, जो अब हारेंगे जाओ कह दो शायरे-म … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: मिला सम्मान उसे नकारुं कैसे? हार पहनाया मुझे, हार उतारुं कैसे? हाय! क्षणभंगुर इन फूलों का जीवन कुम् … more →
विनय wrote 2 years ago: मैं खा़क़सार था उसने मुझको माटी समझा मुझे उम्मीद रही वो मुझको सोने की तरह छूकर देखेगा… उसने कुछ … more →