मिला सम्मान उसे नकारुं कैसे? हार पहनाया मुझे, हार उतारुं कैसे? हाय! क्षणभंगुर इन फूलों का जीवन कुम्हलाकर सब व्यर्थ हो जायगा दिखा दिखा कर अकड़ रहा हूं क्षण गया यह तो अनर्थ हो जायगा बिना तृप्त किये अहं … more →
हरिहर झाविनय wrote 1 year ago: इश्क़ क्या हमको मारेगा, हम इश्क़ को मारेंगे अब तलक क्या हारे हैं उससे, जो अब हारेंगे जाओ कह दो शायरे-म … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: मिला सम्मान उसे नकारुं कैसे? हार पहनाया मुझे, हार उतारुं कैसे? हाय! क्षणभंगुर इन फूलों का जीवन कुम् … more →