दुनियां की तबाही देखने के लिये इंसान का दिल क्यों मचलता है हमारी आंखों के सामने ही सब खत्म हो जाये फिर कोई यहां जिंदा न रह पाये यही सोचकर उसका दिल बहलता है। हम न होंगे पर यह दुनियां रहेगी यही सोच उसका… more →
दीपक भारतदीप की शब्द- पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 3 days ago: दुनियां की तबाही देखने के लिये इंसान का दिल क्यों मचलता है हमारी आंखों के सामने ही सब खत्म हो जाये फ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: सभी लोग हमेशा दूसरे के सुख देखकर मन में अपने लिये उसकी कमी का विचार करते हुए अपने को दुःख देते हैं। … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: पर्दे के पीछे वह खेल रहे हैं सामने उनके पुतले डंड पेल रहे हैं। आत्ममुग्धता हैं जैसे जमाना जीत लिया स … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अमन का फरिश्ता बनने के लिये पहले इस जहां में आग लगा दो फिर उसे बुझा दो। खड़ा कर दो किराये का शैतान जि … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: एक दोस्त ने फोन पर दूसरे दोस्त से ‘क्या स्कोर चल रहा है दूसरा बिना समझे तत्काल बोला ‘यार, ऐसा लगता ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: फंदेबाज मिला रास्ते में और बोला ‘चलो दीपक बापू तुम्हें एक सम्मेलन में ले जायें। वहां सर्वशक्तिमान के … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हमने देखा था उगता सूरज उन्होने देखा डूबता हुआ वह कर रहे थे चंद्रमा की रौशनी में जश्न मनाने की तैयारी … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: चौराहे पर खड़े पत्थर के बुत पर कंकड़ लगने पर भी लोग भड़क जाते हैं। अगला निशाना खुद होंगे यह भय सताता है … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: नाम कुछ दूसरा था पर नायिका सविता भाभी रखकर वह सच का सामना प्रतियागिता में पहुंची और एक करोड़ कमाया। प … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: अपने पर ही यूं हंस लेता हूं। कोई मेरी इस हंसी से अपना दर्द मिटा ले कुछ लम्हें इसलिये उधार देता हूं। … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: बेकद्रों की महफिल में मत जाना बहस के नाम पर वहां बस कोहराम मचेगा पर कौन, किसकी कद्र करेगा। मुस्कराहट … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: नयी बहू कवियित्री है जब सास को पता लगी तो उसकी परीक्षा लेने की बात दिमाग में आयी उसने उससे अपने ऊपर … more →
Shubhashish Pandey wrote 11 months ago: ये गाना कॉलेज टाइम में अपने Back Bencher साथियों के लिए लिखा था जिसे आज यहाँ प्रकाशित कर रहा हूँ. सब … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: डाइन भी सात घर छोड़कर कहर बरपाती अपने पडौस से निभाओ यह तो वह भी सिखाती उसकी राह पर चलने वाले असली भक … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने कुछ लोग खो गए इस शहर की भीड़ में उनके पते लिखे हैं बहुत से कागजों पर जो पड़े हैं फाईलों की भीड़ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कमेन्ट पाने का उसने कीर्तिमान बनाया जोश में आकर उसने लिखा अपनी प्रेयसी को प्रेम पत्र इकतरफा प्रेम ने … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने साथ भतीजे को भी फंदेबाज घर लाया और बोला ‘दीपक बापू, इसकी सगाई हुई है मंगेतर से रोज होती मोबाइल … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जैसे ही कवि ने कहा ”अब मैं आपको अपनी नई कविता ‘प्यार भरा ख़त’ सुनाऊंगा लिफाफे के र … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कुछ पाने के लिये दौड़ता है आदमी इधर से उधर देने का ख्याल कभी उसके अंदर नहीं आता भरता है जमाने का साम … more →