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Blogs about: हास्य कविता

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मनोरंजन की राह-हिंदी व्यंग्य कविता (manoranjan ki rah-hindi satire)

दीपक भारतदीप wrote 3 days ago: दुनियां की तबाही देखने के लिये इंसान का दिल क्यों मचलता है हमारी आंखों के सामने ही सब खत्म हो जाये फ … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक द्वारा, दीपक भारतदीप, bharat, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika, कला, मनोरंजन

समन्दर पीने से भी प्यास नहीं बुझेगी (samandar se bhee pyas nahin bujhegee)2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: सभी लोग हमेशा दूसरे के सुख देखकर मन में अपने लिये उसकी कमी का विचार करते हुए अपने को दुःख देते हैं। … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी शायरी, हिन्दी शेर, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

जब उनके पुतलों की पोल खुल जायेगी-हिंदी कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: पर्दे के पीछे वह खेल रहे हैं सामने उनके पुतले डंड पेल रहे हैं। आत्ममुग्धता हैं जैसे जमाना जीत लिया स … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika

कामयाब इंसान-हिन्दी व्यंग्य कविता (kamyab insan-hindi kavita)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अमन का फरिश्ता बनने के लिये पहले इस जहां में आग लगा दो फिर उसे बुझा दो। खड़ा कर दो किराये का शैतान जि … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, शायरी, समाज, साहित्य, हास्य, हास्य व्यंग्य

नये जमाने में-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: एक दोस्त ने फोन पर दूसरे दोस्त से ‘क्या स्कोर चल रहा है दूसरा बिना समझे तत्काल बोला ‘यार, ऐसा लगता ह … more →

Tags: abhivyakti, अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, क्षणिका, दीपक द्वारा, दीपक भारतदीप, मस्तराम, समाज

न सतयुग, न कलियुग-हास्य कविता (satyug aur kaliyug-hasya kavita

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: फंदेबाज मिला रास्ते में और बोला ‘चलो दीपक बापू तुम्हें एक सम्मेलन में ले जायें। वहां सर्वशक्तिमान के … more →

Tags: writing, हिन्दी, inglish, अभिव्यक्ति, India, अनुभूति, knowledge, समाज, सृजन

किसी को रात डराती,किसी को दिन-हिन्दी शायरी (din aur raat-hindi shayri)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हमने देखा था उगता सूरज उन्होने देखा डूबता हुआ वह कर रहे थे चंद्रमा की रौशनी में जश्न मनाने की तैयारी … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य कविता, समाज, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

बुतों का बाजार-हास्य व्यंग्य कविता (buton ka bazar-hindi hasya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: चौराहे पर खड़े पत्थर के बुत पर कंकड़ लगने पर भी लोग भड़क जाते हैं। अगला निशाना खुद होंगे यह भय सताता है … more →

Tags: writing, अभिव्यक्ति, bhaarat, भारत, shayree, Shayri, अनुभूति, media, Internet

सविता भाभी ने किया सच का सामना-हिन्दी हास्य कविता (savita bhabhi ne kiya sach ka samana-hasya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: नाम कुछ दूसरा था पर नायिका सविता भाभी रखकर वह सच का सामना प्रतियागिता में पहुंची और एक करोड़ कमाया। प … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, व्यंग्य, समाज, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Deepak bapu

हंसी के खजाने की तलाश-हिंदी शायरी (hansi ka khazana-hindi shayri)4 comments

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: अपने पर ही यूं हंस लेता हूं। कोई मेरी इस हंसी से अपना दर्द मिटा ले कुछ लम्हें इसलिये उधार देता हूं। … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging

मुस्कराहट का मुखौटा-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: बेकद्रों की महफिल में मत जाना बहस के नाम पर वहां बस कोहराम मचेगा पर कौन, किसकी कद्र करेगा। मुस्कराहट … more →

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बहु ने लिखी कविताएँ-व्यंग्य शायरी 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: नयी बहू कवियित्री है जब सास को पता लगी तो उसकी परीक्षा लेने की बात दिमाग में आयी उसने उससे अपने ऊपर … more →

Tags: कला, कविता, मस्तराम, व्यंग्य, शायरी, शेर, साहित्य, हास्य, हास्य व्यंग्य

The back bencherz 22 comments

Shubhashish Pandey wrote 11 months ago: ये गाना कॉलेज टाइम में अपने Back Bencher साथियों के लिए लिखा था जिसे आज यहाँ प्रकाशित कर रहा हूँ. सब … more →

Tags: Hasya kavita, Kavita, कला, कविता, मुक्तक, शुभाशीष, शेर, हास्य, हास्य व्यंग

पड़ौस पर हमला न करो यह तो डाइन भी सिखाती-व्यंग्य कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: डाइन भी सात घर छोड़कर कहर बरपाती अपने पडौस से निभाओ यह तो वह भी सिखाती उसकी राह पर चलने वाले असली भक … more →

Tags: Blogroll, hindi journlism, hindi epatrika, web duniya, web dunia, hindi nai duinia, Deepak bharatdeep, hindi jagran, deshboard

कुछ लोग खो गए इस शहर की भीड़ में-व्यंग्य कविता4 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने कुछ लोग खो गए इस शहर की भीड़ में उनके पते लिखे हैं बहुत से कागजों पर जो पड़े हैं फाईलों की भीड़ … more →

Tags: हिन्दी, hindi, साहित्य, हिन्दी शेर, hasya kavita, हिन्दी शायरी, bharatdeep

कविता लिखने में हिट पर प्यार में फ्लाप पाया-हास्य व्यंग्य कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कमेन्ट पाने का उसने कीर्तिमान बनाया जोश में आकर उसने लिखा अपनी प्रेयसी को प्रेम पत्र इकतरफा प्रेम ने … more →

Tags: Blogroll, writing, हिन्दी, inglish, हिंदी, साहित्य, हिंदी साहित्य, edcation, bharat

कोई प्यार की भाषा नहीं समझता-हास्य व्यंग्य कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने साथ भतीजे को भी फंदेबाज घर लाया और बोला ‘दीपक बापू, इसकी सगाई हुई है मंगेतर से रोज होती मोबाइल … more →

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प्रेमपत्र लिखने का युग बीत गया-हास्य व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जैसे ही कवि ने कहा ”अब मैं आपको अपनी नई कविता ‘प्यार भरा ख़त’ सुनाऊंगा लिफाफे के र … more →

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शब्दों के फूल कभी नहीं मुरझाये-हिंदी शायरी1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कुछ पाने के लिये दौड़ता है आदमी इधर से उधर देने का ख्याल कभी उसके अंदर नहीं आता भरता है जमाने का साम … more →

Tags: Blogroll, Hindi Poem, Hindi friends, hindi epatrika, web duniya, web dunia, hindi megzine, Deepak bharatdeep, hindi bhasakar


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