Blogs about: हास्य कविता

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मुस्कराहट का मुखौटा-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: बेकद्रों की महफिल में मत जाना बहस के नाम पर वहां बस कोहराम मचेगा पर कौन, किसकी कद्र करेगा। मुस्करा … more →

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बहु ने लिखी कविताएँ-व्यंग्य शायरी 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: नयी बहू कवियित्री है जब सास को पता लगी तो उसकी परीक्षा लेने की बात दिमाग में आयी उसने उससे अपने ऊपर … more →

Tags: कला, कविता, मस्तराम, व्यंग्य, शायरी, शेर, साहित्य, हास्य, हास्य व्यंग्य

The back bencherz 19 comments

Shubhashish Pandey wrote 6 months ago: ये गाना कॉलेज टाइम में अपने Back Bencher साथियों के लिए लिखा था जिसे आज यहाँ प्रकाशित कर रहा हूँ. सब … more →

Tags: Hasya kavita, Kavita, कला, कविता, मुक्तक, शुभाशीष, शेर, हास्य, हास्य व्यंग

पड़ौस पर हमला न करो यह तो डाइन भी सिखाती-व्यंग्य कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: डाइन भी सात घर छोड़कर कहर बरपाती अपने पडौस से निभाओ यह तो वह भी सिखाती उसकी राह पर चलने वाले असली … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, कविता, मस्तराम, व्यंग्य, शायरी, साहित्य, हास्य

कुछ लोग खो गए इस शहर की भीड़ में-व्यंग्य कविता4 comments

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: अपने कुछ लोग खो गए इस शहर की भीड़ में उनके पते लिखे हैं बहुत से कागजों पर जो पड़े हैं फाईलों की भीड़ … more →

Tags: हिन्दी, hindi, साहित्य, हिन्दी शेर, hasya kavita, हिन्दी शायरी, bharatdeep

कविता लिखने में हिट पर प्यार में फ्लाप पाया-हास्य व्यंग्य कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: कमेन्ट पाने का उसने कीर्तिमान बनाया जोश में आकर उसने लिखा अपनी प्रेयसी को प्रेम पत्र इकतरफा प्रेम ने … more →

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कोई प्यार की भाषा नहीं समझता-हास्य व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: अपने साथ भतीजे को भी फंदेबाज घर लाया और बोला ‘दीपक बापू, इसकी सगाई हुई है मंगेतर से रोज होती मोबाइल … more →

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प्रेमपत्र लिखने का युग बीत गया-हास्य व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: जैसे ही कवि ने कहा ”अब मैं आपको अपनी नई कविता ‘प्यार भरा ख़त’ सुनाऊंगा लिफाफे के र … more →

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शब्दों के फूल कभी नहीं मुरझाये-हिंदी शायरी1 comment

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: कुछ पाने के लिये दौड़ता है आदमी इधर से उधर देने का ख्याल कभी उसके अंदर नहीं आता भरता है जमाने का साम … more →

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खबरों की खबर देने वाले-व्यंग्य कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: खबरों की खबर वह रखते हैं अपनी खबर हमेशा ढंकते हैं दुनियां भर के दर्द को अपनी खबर बनाने वाले अपने वास … more →

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जब टूटता है सन्नाटा-हिंदी शायरी2 comments

दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: जब जज्बातों में आता ठहराव तब शब्द खामोश हो जाते स्तब्ध मन सन्नाटे में ताकता है उस समय न सोचना अच् … more →

Tags: inglish, कविता, अभिव्यक्ति, चिन्तन, India, साहित्य, हिंदी साहित्य, media, film

क्या फायदा विषय का पहाड़ खोदने से-हास्य कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: समाज के शिखर पर बैठे लोग हांकते हैं ऐसे आदमी को जैसे भेड़-बकरी हों जो न बोले न कहे न देखे उनके काले … more →

Tags: Blogroll, Hindi hasya, hindi journlism, hindi epatrika, web duniya, web dunia, hindi megzine, Deepak bharatdeep, Deepak bapu

इंसान कभी चिराग नहीं हो सकते-हिन्दी शायरी 4 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: यूं तो चमकता चाँद देखकर अपना दिल बहला लेते पर जब आकाश में नहीं दिखता वह छोटा चिराग जला लेते हैं जिन् … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, कविता, जजबात, मस्तराम, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी शायरी

मानते नहीं तो फिर पत्थर क्यों उड़ाते-कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कहते हैं पत्थर के बुतों में भगवान नहीं मानेंगे पर भगवान के बुत उड़ाने पहुंच जाते जवाब नहीं देना इसल … more →

Tags: Blogroll, writing, inglish, व्यंग्य चिंतन, शेर-ओ-शायरी, शायरी, अभिव्यक्ति, चिन्तन, India

बनते बिगड़ते हैं रंग और इंसान -कविता3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पल रंग बदलती दुनियां में रिश्ते भी बदलते हैं रंंग जो सारी उमर साथ चलने का एलान करते सरेआम वह कभी नही … more →

Tags: vyangya, vividha, inglish, संपादकीय, कविता, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, चिन्तन, India

अकेले होने के गम में इसलिये रोते रहे-कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: भीड़ में हमेशा खोते रहे अपने से न मिलने के गम में रोते रहे नहीं ढूंढा अपने को अंदर आदमी होकर भी रहा … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, कविता, जजबात, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य

कभी कभी आंखों में आंसू आ जाते हैं-हिन्दी शायरी4 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने दर्द से भला कहां हमारे आंखों में आसू आते हैं दूसरों के दर्द से ही जलता है मन उसी में सब सूख जात … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, जजबात, मस्तराम, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी पत्रिका

तीन क्षणिकाऐं4 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: किसी को खुश देखकर ही जब मजा आता हो तब कही तारीफें झूठ में भी लोग कर जाते हैं सच से फरेब करने में नह … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, कविता, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य

उसे भी समाज कहते हैं-कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आदमी से ही डरा आदमी अपने लिये एक झुंड बना लेता है जिसे समाज कहते हैं अकेले होने की सोच से घबड़ाया आद … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, कविता, जजबात, मस्तराम, व्यंग्य, शायरी, शेर


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