Blogs about: हास्य व्यंग्य

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जो सभी को पसंद हो वही कहो -हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 13 hours ago: प्रवचन करते समय गुरुजी ने भक्तों को समझाया। ‘‘भ्रष्टाचार करना होता बहुत बड़ा शाप दहेज समाज के लिये ह … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, लघुकथा, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

बरसात के साथ धार्मिक चालाकी-हिंदी व्यंग्य (hindi vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 1 day ago: अध्यात्म नितांत एक निजी विषय है पर जब उसकी चौराहे पर चर्चा होने लगे तो समझ लो कि कहीं न कहीं उसकी आ … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, पर्यावरण, मस्तराम, व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging

आपरेशन तो आसान है -हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 4 days ago: सरकारी अस्पताल में एक सफाई कर्मचारी ने एक तीन साल के बच्चे के गले का आपरेशन कर दिया। उस बच्चे के गले … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिन्तन, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मनोरंजन, मस्तराम, समाज, साहित्य

छोटा आदमी, बड़ा आदमी-लघुकथा

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: वह शिक्षित बेरोजगार युवक संत के यहां प्रतिदिन जाता था। उसने देखा कि उनके आशीर्वाद से अनेक लोगों की … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, लघुकथा, व्यंग्य, समाज, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

अब चढ़ी इसको5 comments

दरभंगिया wrote 2 weeks ago: बहुत दिनों बाद यह किस्सा याद आया, तो सोचा आप लोगों से भी बाँट लूं. हो सकता है आप ने पहले भी सुना हो. … more →

Tags: चुटकुले, हिन्दी, मशखरी, chutkule, Laugh, mahadev, Sharab, sharabee, shiv

समाज और खानदान की छबि -दो व्यंग्य क्षणिकायें

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: जिन कहानियों में हर पल क्लेशी पात्र सजाये जाते उसी पर बने नाटक सामाजिक श्रेणी के कहलाते सच है समाज … more →

Tags: अभिव्यक्ति, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

पिंजर से बाहर झांकता ज्ञान-आलेख चिंत्तन

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: उनके चेहरे पर बटन की तरह टंगी आंखें कपड़े और किताबों के पिंजर से बाहर झांकती दिखती है। ऐसा लगता है क … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, darshan, Dashboard, Deepak bharatdeep, epatrika, hindi megzine, hindi patrika

सीधे सवाल के उल्टे जवाब6 comments

दरभंगिया wrote 1 month ago: प्रश्न: बेटे और गधे में क्या फर्क है? उत्तर: कमाने वाला बेटा कहलाता है और दूसरा गधा. प्रश्न: लड़किया … more →

Tags: चुटकुले, हिन्दी, Jokes, chutkule

अगर बंगलोर बिहार में होता2 comments

दरभंगिया wrote 1 month ago: अगर बंगलोर बिहार में होता तो सड़क पर विचरने वाली गायों को देखकर फिकरे कसे जाते “मंत्री जी हटिये … more →

Tags: कविता, हिन्दी, बंगलोर, बिहार, Bangalore, Bihar, Bihārī

पागल हूँ, बेवकूफ नहीं9 comments

दरभंगिया wrote 1 month ago: एक बार पागलों को ले कर जाने वाली एक गाड़ी के ड्राईवर को रास्ते में ही दीर्घ शंका की तत्काल आवश्यकता म … more →

Tags: चुटकुले, हिन्दी, मशखरी, hindi

मुक्केबाज राहुल गांधी (व्यंग्य/कार्टून)1 comment

K M Mishra wrote 1 month ago: राहुल गांधी ने चुनाव के पहले 2 महीने तक द्रोणाचार्य पुरूस्कार विजेता मुक्केबाजी कोच श्री ओम प्रकाश … more →

Tags: hasya -vyangya, हिन्दी हास्य व्यंग्, सामाजिक, राजनैतिक विसंगतियों, राष्ट्रीय, चुनाव, election, कार्टून, Humor

टेलीफोन की हड़ताल का तिलिस्म-व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: देश की एक टेलीफोन कंपनी में कर्मचारियों की हड़ताल हो गयी तो उसके इंटरनेट प्रयोक्ताओं को भारी परेशानी … more →

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बिना मेकअप के अभिनय-हास्य व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: फिल्म का नाम था ‘नौकरानी ने बनी रानी’ जोरदार थी कहानी। निर्देशक ने अभिनेत्री से कहा ‘आधी फिल्म में म … more →

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कुछ सच कुछ झूठ-लघु कथा

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: शादी में वह बच्चा अपने मां बाप और दादा के साथ गया। शादी उच्च घराने की थी। वहां तमाम तरह का तामझाम थ … more →

Tags: चिन्तन, दीपक द्वारा, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य चिंतन, सृजन, हंसना, हिन्दी

बीच बाज़ार में-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सूरत देखकर ही लोग सिर पर ताज पहनाते हैं किसकी सीरत कौन देखेगा अपने काम पर लोग खुद ही शर्माते हैं. कह … more →

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बुत सम्मलेन में एक सवाल-लघु कथा

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: वह विशेष बुत अपना भाषाण दे रहा था। उसका विषय था समाज की समस्यायें और उनका हल। उसने अपना भाषण समाप्त … more →

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आशीर्वाद-लघुकथा2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: वह युवक गरीब था तब संत के पास जाता था। वह उनके यहां आश्रम की साफ सफाई करता और फिर अपने काम पर चला ज … more →

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‘‘मैं कुर्सी हूं, किसी की सगी नहीं’’-हास्य व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: कुर्सी पर चाहे लिपिक लिखा हो या महाप्रबंधक बस वह मिलना चाहिए। अपने घर में जिस पर स्वयं बैठ सकें वह ल … more →

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बाजार की आस्था या आस्था का बाजार-हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: कहीं न्यूजीलैंड में इस बात को लेकर लोग नाराज है कि ‘हनुमान जी पर कंप्यूटर गेम बना दिया गया है और बच् … more →

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