आज मैं अपने डेस्क को ठीक कर रहा था और कहीं कोने से मेरे हाथ एक फोल्डर लगा | उस फोल्डर में रंगीन कगाज़ में लिखी मेरी पांच कवितायेँ मिली – चार हिंदी और एक अंग्रेजी | अंग्रेजी कविता “Only I c… more →
Nitin Jalanmequitnever wrote 6 months ago: आज मैं अपने डेस्क को ठीक कर रहा था और कहीं कोने से मेरे हाथ एक फोल्डर लगा | उस फोल्डर में रंगीन कगाज … more →
mequitnever wrote 8 months ago: सफ़र की क्या मंजिल हो लहरों का क्या साहिल हो माझी का क्या नाव हो सपनो की क्या उड़ान हो देखते थे यह सब … more →