Blogs about: हिंदी गझल
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खेल ये है अपनी पसंद का
खेल ये है अपनी पसंद का, खेलतें ही जाएंगे। चाहें धोका लाख खाए, प्यार लुटाते जाए… more »
हिंदी गझल
खेल ये है अपनी पसंद का
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gulkand wrote 2 months ago: खेल ये है अपनी पसंद का, खेलतें ही जाएंग … more »
सुबह से शाम तक
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gulkand wrote 2 months ago: सुबह से शाम तक गुनगुनाता रहुगा। मै तेर … more »
क्या बताऊं?
gulkand wrote 2 months ago: क्या बताऊं यार के, कयामत मेरे साथ हुई। … more »
मांगा तो नही था
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gulkand wrote 2 months ago: देख के हमें क्यूं, मूंह फेर लिया सितमग … more »
क्या यहा अपना है?
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gulkand wrote 2 months ago: ना जमीं अपनी है, ना फलक अपना है। बस इक म … more »
तंग आ गये है जिंदगी से
gulkand wrote 2 months ago: तंग आ गये है जिंदगी से, अब मौत चाहीए। इस … more »
हँस के क्या देखा उन्होने
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gulkand wrote 2 months ago: हँस के क्या देखा उन्होने, के निशाने बन … more »
