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Blogs about: हिंदी पत्रिका

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तेरी भाषा, मेरी भाषा-व्यंग्य लेख

दीपक भारतदीप wrote 20 hours ago: शाम के समय दीपक बापू अपने घर से बाहर निकल एक निकट के उद्यान में हवा खाने पहुंचे। अंदर प्रवेश करने से … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, कला, भाषा विवाद, मनोरंजन, मस्त राम, मस्ती, समाज

नई पीढ़ी को मौक़ा-हास्य व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 2 days ago: अपने विरोधी पर शब्द प्रहार करते हुए उन्होंने कहा ‘वह बरसों जनता की सेवा में लगे हैं लोग भी अब उनके च … more →

Tags: मस्तराम, समाज, हिन्दी, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, Hindi Blogging, hindi internet, Hindi knowledge, hindi megzine

भाषा का लफड़ा-हिन्दी हास्य व्यंग्य (bhasha ka lafada-hindi commedy satire

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: शाम के समय दीपक बापू अपने घर से बाहर निकल एक निकट के उद्यान में हवा खाने पहुंचे। अंदर प्रवेश करने से … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, सूचना, हिन्दी, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, hindi abhivyakti, Hindi Blogging

किताबों में लिखे शब्द दुनियां नहीं चलाते-व्यंग्य कविता (kitab,shabd aur duniya-vyangya kavita)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: किताबों में लिखे शब्द कभी दुनियां नहीं चलाते। इंसानी आदतें चलती अपने जज़्बातों के साथ कभी रोना कभी ह … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, व्यंग्य, हिन्दी, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, hindi bharat, hindi bhasha, Hindi Blogging

चाणक्य नीति-संतोष से ही अमृत मिलता है

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: संतोषाऽमृत-तुप्तानां यत्सुखं शान्तचेतसाम्। न च तद् धनलूब्धानामितश्चयेतश्च धावताम्।। हिंदी में भावार् … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, समाज, सूचना, हिन्दी, अध्यात्म, ज्ञान, धर्म

भर्तृहरि नीति शतक-क्षमा करती है कवच की तरह काम

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: क्षान्तिश्चत्कवचेन किं किमनिरभिः क्रोधीऽस्ति चेद्दिहिनां ज्ञातिश्चयेदनलेन किं यदि सहृदद्दिव्यौषधं कि … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आध्यात्म, हिन्दी, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, hindi abhivyakti, hindi bhasha, Hindi Blogging

भीड़ में अपनी पहचान मत ढूंढो-व्यंग्य कविता (pahchan-vyangya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: भीड़ में अपनी पहचान ढूंढते हुए क्यों अपना वक्त बर्बाद करते हो. भीड़ जुटाने वाले सौदागरों के लिए हर श … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, समाज, हिन्दी, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, Hindi Blogging, hindi chating

संत कबीरदास-धर्म का आशय कौन जानता है (dharm ka ashaya-kabirdas ji

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: कहै हिन्दु मोहि राम पिआरा, तुरक कहे रहिमाना। आपस में दोऊ लरि-लरि मुए, मरम न कोऊ जाना।।संत शिरोमणि कब … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आध्यात्म, आलेख, समाज, हिन्दी, adhyatm, कला

ब्लॉग का हिंदी अर्थ 'निज पत्र' या 'पत्रिका' भी हो सकता है

दीपक भारतदीप wrote 4 weeks ago: ब्लाग का अगर कोई लाक्षणिक अर्थ-इसका हिंदी में कोई शब्दिक अर्थ नहीं है ऐसा कहा जाता है-अगर कुछ हो सकत … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, हिन्दी, कला, पत्रिका, मनोरंजन, मस्ती, समाज

संत कबीरदास के दोहे-अपनी तारीफ और दूसरे की बुराई न करें (kabir ke dohe-apne tarif aur doosre ke burai na karen)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: आपन को न सराहिये, पर निन्दिये न नहिं कोय। चढ़ना लम्बा धौहरा, ना जानै क्या होय।। संत शिरोमणि कबीरदास ज … more →

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रहीमदास के दोहे-अपने मन की बात दूसरे को न बताएं (apne man ki bat-rahim das ke dohe)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: रहिमन निज मन की, बिथा, मन ही राखो गोय। सुनि अठिलैह लोग सब, बाटि न लैहैं न कोय।। कविवर रहीम कहते हैं … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, हिन्दी, adhyatm, जागरण, धर्म, संदेश, समाज

संत कबीर के दोहे-कष्ट और कलह की जड़ है गाली देना (gali dena galat-kabir ke dohe

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: आवत गारी एक है, उलटत होय अनेक। कहैं कबीर नहिं उलटिये, वही एक की एक।संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं क … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, कबीर, कला, मस्तराम, समाज, हिन्दी, Blogroll

आज दीपावली है-आलेख (Today Deepawali-hindi article)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: यह प्रकाश पर्व है और इसी दिन लक्ष्मी जी की आराधना खुलकर की जाती है। वैसे तो लक्ष्मी का हर कोई भक्त ह … more →

Tags: hindi adhyatm, Deepak bharatdeep, Deepak bapu, दृष्टिकोण, मनोरंजन, अभिव्यक्ति, अनुभूति, मस्तराम, अध्यात्म

घर का रोना-हास्य व्यंग्य कविता (ghar ka rona-vyangya kavita

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: छायागृह में चलचित्र के एक दृश्य में नायक घायल हो गया तो एक महिला दर्शक रोने लगी। तब पास में बैठी दूस … more →

Tags: arbic, अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिन्तन, दीपक भारतदीप, व्यंग्य, शब्द, हास्य, हिन्दी

वैश्विक काल में हिन्दी और पुराने आधार-हिंदी लेख

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: तीस साल तक एक प्रतिष्ठित सम्मान समारोह के निर्णायक मंडल में रहे एक माननीय लेखक ने जब यह रहस्योद्घाटन … more →

Tags: Deepak bharatdeep, Deepak bapu, आलेख, अभिव्यक्ति, आध्यात्म, अनुभूति, हिन्दी, संपादकीय, मनोरंजन

अखबार ने पाठ छापा पर नाम नहीं-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: हिंदी की सेवा करने का दावा करने वाले बहुत हैं। इनके नाम भी आपने देखे होंगे। यह लोग हिंदी के नाम पर क … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आध्यात्म, आलेख, मस्तराम, हिन्दी, Blogroll, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

भर्तृहरि नीति शतक-कविताओं से बहकाया जाता है (hindi santdesh-kavitavon se bharam

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि ————————- सत्यत्वे न शशा … more →

Tags: Hindi knowledge, Hindi Darshan, Hindu darshan, Hindu culture, hindu dharm, hindi abhivyakti, hindi chating, hindi megzine, hindi thinking

चाणक्य दर्शन-जीवन में जागरुकता आवश्यक (chankya darshan in hindi)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: गूढ़मैथुनचरित्वं च काले काले संग्रहम्। अप्रमत्तमविश्वासं पंच शिक्षेच्च वायसात्।। हिंदी में भावार्थ-छि … more →

Tags: अध्यात्म, आलेख, कला, समाज, हिन्दी, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, hindi Personal, hindi vichar

मनुस्मृति-दूसरों के माल पर नजर न डालें (paraya mal apna na samjhen)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: मनु महाराज कहते हैं कि —————— यानाश्य्यासनान्यस्य, कूपोद्यान ग्र … more →

Tags: hindi Personal, Hindi knowledge, Hindi Darshan, hindi adhyatm, hindi abhivyakti, hindi megzine, hindi shabd, hindi internet, Hindi Blogging


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