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मनुष्य के अलावा कोई दूसरा प्राणी समलैंगिक नहीं होता-संपादकीय (ariticle on homsexuality)

दीपक भारतदीप wrote 7 hours ago: समलैंगिक मामले पर न्यायालय का निर्णय शिरोधार्य! लोगों के अपने दैहिक संबंधों पर स्वयं ही निर्णय करने … more →

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भारत के शिक्षित लोगों का बौद्धिक अंतर्द्वंद्व -आलेख

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: भारत का शिक्षित वर्ग हमेशा ही मानसिक द्वंद्व में फंसा दिखता है जो पश्चात्य सभ्यता के समर्थन और विरो … more →

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कबीर के दोहेः दिल टूटने पर कुछ भी नहीं अच्छा लगता

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: धरती फाटे मेघ मिलै, कपड़ा फाटे डौर तन फाटे को औषधि, मन फाटे नहिं ठौर संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं … more →

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विदुर नीति-अपराधी की संगत करने पर भी सजा मिल जाती है

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: नीति विशारद विदुर महाराज कहते है कि अस्तयागात् पापकृतामापापांस्तुल्यो दण्डः स्पृशते मिश्रभावात्। शुष … more →

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चाणक्य नीति-दूसरों का आसरा लेने वाले जल्दी तबाह हो जाते हैं 4 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: निर्धनं पुरुषं वेश्या प्रजा भग्नं नृपं त्यजेत्। खग चीतफल वृक्षं भुक्त्वा चाऽभ्यागता गृहम्।। हिंदी मे … more →

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मनुस्मृति:आयु,सफ़ेद बाल और धन से ज्ञान और आचरण का महत्त्व

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: मनु महाराज कहते है कि ————— न हायनैर्न पालितैर्न वित्तेन न बंधुभिः । ऋ … more →

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भर्तृहरि शतकः खामोश रहने से होते ढेर सारे लाभ 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: स्वायत्तेमेकांतगुणं विधात्रा विनिर्मितम् छादनमज्ञतायाः। विशेषतः सर्वविदां समाजे विभूषणं मौनमपण्डितना … more →

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रहीम दास के दोहे-जो करे काम, वही पाता है सम्मान

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: धनि रहीम जल पंक को, लघु जिय पियत अघाय उदधि बड़ाई कौन है, जगत पिआसौ जाय कविवर रहीम कहते हैं कि गंदे स … more →

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क्यों जंग का बिगुल बजा रहे हो-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: कमरों में बंद दौलत लूटकर लुटेरे जा सके यहां से कितनी दूर। उसकी चकाचैंध में रौशनी खो बैठे उनके नूर। अ … more →

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संत कबीर दास वाणीः हृदय की बात स्वत: जाने वही है सच्चा प्रेम

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: यह तत वह तत एक है, एक प्रान दुइ गात अपने जिय से जानिये, मेरे जिय की बात संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते … more →

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कबीर के दोहे: मन पर स्वयं सवारी करें, उसे सवार न बनायें

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: मन के मते न चालिये, मन के मते अनेक जो मन पर असवार है,सौ साधु कोय एक संत कबीर कहते हैं कि मन के अनुसा … more →

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सब चलता है-हास्य व्यंग्य कविताएँ

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हम खड़े हैं जहां छू रहा है चारों तरफ से डीजल और पेट्रोल का धुआं। कोई बात नहीं सब चलता है यह भी चलेगा … more →

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झूठ भी सच की तरह सजाते-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हर पल लोगों के सामने अपना कद बढाने की कोशिश हर बार समाज में सम्मान पाने की कोशिश आदमी को बांधे रहती … more →

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चाणक्य नीतिः धर्म परिवर्तन बनता है तनाव का कारण (chankya niti)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: आत्मवर्ग परित्यन्य परवर्गे समाश्रितः। स्वयमेव लयं याति यथा राजात्यधर्मतः।। नीति विशारद चाणक्य कहते ह … more →

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इंटरनेट पर हिंदी का वैश्विक काल प्रारंभ हो चुका है-संपादकीय

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हिंदी में विभिन्न कालों की चर्चा बहुत रही है। सबसे महत्वपूर्ण स्वर्णकाल आया जिसमें हिंदी भाषा के लि … more →

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विदुर नीति: खामोशी की बजाय सच बोलना ठीक

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: बोलने से न बोलना अच्छा बताया गया है, किन्तु सत्य बोलना भी एक गुण है। चुप या मौन रहने से सत्य बोलना … more →

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चाणक्य नीतिः अपने धर्म और भक्ति में बदलाव बनता है तनाव का कारण

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: नीति विशारद चाणक्य कहते हैं आत्मवर्ग परित्यन्य परवर्गे समाश्रितः। स्वयमेव लयं याति यथा राजात्यधर्मतः … more →

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दक्षिण एशिया के साहित्यकार आतंक पर सच लिख भी कहां पाये-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: अभी हाल ही में दक्षिण एशिया के देशों का एक साहित्यकार सम्मेलन संपन्न हुआ। इसमें भारत, पाकिस्तान,श्री … more →

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भर्तृहरि शतकः कामदेव करते हैं इस विश्व में अद्भुत लीला1 comment

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: कृशः काणः खञ्ज श्रवणरहितः पुच्छविकलो व्रणी पूयक्लिनः कृमिकुलशतैरावुततनु क्षुधाक्षामो जीर्णः पिठरककाप … more →

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