Blogs about: हिंदी साहित्य

Featured Blog

मनुष्य के अलावा कोई दूसरा प्राणी समलैंगिक नहीं होता-संपादकीय (ariticle on homsexuality)

दीपक भारतदीप wrote 2 hours ago: समलैंगिक मामले पर न्यायालय का निर्णय शिरोधार्य! लोगों के अपने दैहिक संबंधों पर स्वयं ही निर्णय करने … more →

Tags: Blogroll, Hindi online journalism, Hindu darshan, Hindu culture, web duniya, Hindi vews, hindi abhivyakti, hindi megzine, hindi thinking

जो सभी को पसंद हो वही कहो -हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 16 hours ago: प्रवचन करते समय गुरुजी ने भक्तों को समझाया। ‘‘भ्रष्टाचार करना होता बहुत बड़ा शाप दहेज समाज के लिये ह … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, लघुकथा, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, हास्य व्यंग्य, हिन्दी

बरसात के साथ धार्मिक चालाकी-हिंदी व्यंग्य (hindi vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 1 day ago: अध्यात्म नितांत एक निजी विषय है पर जब उसकी चौराहे पर चर्चा होने लगे तो समझ लो कि कहीं न कहीं उसकी आ … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, पर्यावरण, मस्तराम, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

विदुर नीति-कम ताकत के होते गुस्सा करना तकलीफदेह

दीपक भारतदीप wrote 3 days ago: द्वावेव न विराजेते विपरीतेन कर्मणा। गृहस्थश्च निरारम्भः कार्यवांश्चैव भिक्षुकः।। हिंदी में भावार्थ-न … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, कला, मस्तराम, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging

आपरेशन तो आसान है -हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 4 days ago: सरकारी अस्पताल में एक सफाई कर्मचारी ने एक तीन साल के बच्चे के गले का आपरेशन कर दिया। उस बच्चे के गले … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिन्तन, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मनोरंजन, मस्तराम, समाज, साहित्य

लाज ओढूं (गीत) घनश्याम ठक्कर

kalapiketan wrote 6 days ago: लाज ओढूं (गीत) घनश्याम ठक्कर … more →

Tags: गीत, गीत -घनश्याम ठक्कर, गीत-काव्य, घनश्याम ठक्कर, साहित्य, हिन्दी कविता, हिन्दी गीत, हिन्दी नेट, Geet - Ghanshyam Thakkar

सि़यों की कम संख्या उनके प्रति बढ़ते अपराधों के लिये जिम्मेदार-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 6 days ago: देश में प्रतिदिन ही महिलाओं के प्रति किये गये अपराध समाचारों की सुर्खियां बन रहे हैं। हालत यह हो ग … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, मस्त राम, शब्द, सन्देश, साहित्य, हिन्दी, bharat

नस्ली भेदभाव का एक छोटा-सा अनुभव1 comment

योगेन्द्र wrote 1 week ago: मानव समाज में भेदभाव की भावना सर्वव्यापी है । भेदभाव का आधार सभी समाजों में एक ही हो ऐसा नहीं है । अ … more →

Tags: अनुभव, आपबीती, मानव व्यवहार, लघुकथा, किस्सा, Short Stories, जातिवाद, Casteism, नस्ली भेदभाव

याद आया (गझल) - घनश्याम ठक्कर

kalapiketan wrote 2 weeks ago: याद आया गझल घनश्याम ठक्कर … more →

Tags: Oasis Thacker, घनश्याम ठक्कर, हिन्दी कविता, कविता, हिन्दी ब्लोग, हिन्दी नेट, Gazal, हिन्दी गझल, Ghanshyam Thakkar

छोटा आदमी, बड़ा आदमी-लघुकथा

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: वह शिक्षित बेरोजगार युवक संत के यहां प्रतिदिन जाता था। उसने देखा कि उनके आशीर्वाद से अनेक लोगों की … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, लघुकथा, व्यंग्य, समाज, हास्य व्यंग्य, हिन्दी

इस ब्लाग/पत्रिका ने पार की पाठक संख्या पचास हजार-संपादकीय

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: पाठ पठन/पाठक संख्या पचास हजार पार करने वाला ईपत्रिका इस लेखक का तीसरा ब्लाग/पत्रिका है। इसने हाल ही … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, मस्तराम, समाज, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Deepak bapu

चैतकी रजनी और् चंद्रमा (अछांदस) - घनश्याम ठक्कर1 comment

kalapiketan wrote 2 weeks ago: चैतकी रजनी और्  चंद्रमा अछांदस घनश्याम ठक्कर … more →

Tags: Oasis Thacker, घनश्याम ठक्कर, हिन्दी कविता, कविता, हिन्दी ब्लोग, हिन्दी नेट, Ghanshyam Thakkar, Hindi Literature, साहित्य

फिर छाने लगा है क्रिकेट का बुखार-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: बंदर चाहे कितना भी बूढ़ा हो जाये गुलाट लगाना नहीं भूलता यही कुछ हालत हम भारतवासियों की है। कोई व्यसन … more →

Tags: writer, हिंदी आलेख, समाज, दीपक भारतदीप, web bhaskar, web jagran, web panjab kesri, web sindh kesri, web bharat

यहां ठग कौन है-हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: ‘एक के तीन’, और ‘दो के छह’ की आवाज कहीं भी सुन लें तो हम भारतीयों के कान खड़े हो जाते हैं यह सोचकर कि … more →

Tags: चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्त राम, मस्तराम, लेखक, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bharatdeep, hasya

समाज और खानदान की छबि -दो व्यंग्य क्षणिकायें

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: जिन कहानियों में हर पल क्लेशी पात्र सजाये जाते उसी पर बने नाटक सामाजिक श्रेणी के कहलाते सच है समाज … more →

Tags: अभिव्यक्ति, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, हास्य व्यंग्य, हिन्दी

भर्तृहरि शतक-बुरे संस्कार बुढ़ापे तक साथ रहते हैं

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि —————— तानींद्रियाण्यविकलानि तदेव ना … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, मस्तराम, संस्कार, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging

"माँ कह एक कहानी।" - मैथिलीशरण गुप्त10 comments

kalapiketan wrote 3 weeks ago: “माँ कह एक कहानी।” मैथिलीशरण गुप्त ——————— … more →

Tags: घनश्याम ठक्कर, मैथिलीशरण गुप्त, साहित्य, हिन्दी कविता, हिन्दी नेट, हिन्दी ब्लोग, Ghanshyam Thakkar, Hindi Literature, Hindi Poems

नस्लवाद और गुणों का स्वरूप-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: शायद कुछ समाज सुधारकों को यह बुरा लगे पर सच यही है कि इस धरती पर पैदा हर जीव की नस्ल होती है और उसमे … more →

Tags: aritile in hindi, दीपक भारतदीप, हिंदी आलेख, हिन्दी, Blogger, Deepak bharatdeep, Hindi writing, hindu darashan, hindu dharm

पिंजर से बाहर झांकता ज्ञान-आलेख चिंत्तन

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: उनके चेहरे पर बटन की तरह टंगी आंखें कपड़े और किताबों के पिंजर से बाहर झांकती दिखती है। ऐसा लगता है क … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, हास्य व्यंग्य, darshan, Dashboard, Deepak bharatdeep, epatrika, hindi megzine


Have your say. Start a blog.

See our free features →

Related Tags
All →

Follow this tag via RSS

Find other items tagged with “हिंदी-साहित्य”:
Technorati Del.icio.us IceRocket