प्राचीन भारतीय योग साधना पद्धति की तरफ पूरे विश्व का रुझान बढ़ना कोई अस्वाभाविक घटना नहीं है। आज से दस वर्ष पूर्व तक अनेक लोग योगसाधना को अत्यंत गोपनीय या असाधारण बात समझते थे। ऐसी धारणा बनी हुई थी कि … more →
दीपक भारतदीप की ई-पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 16 hours ago: किताबों में लिखे शब्द कभी दुनियां नहीं चलाते। इंसानी आदतें चलती अपने जज़्बातों के साथ कभी रोना कभी ह … more →
योगेन्द्र जोशी wrote 21 hours ago: प्रदर्शन की लालसा या प्रवृत्ति प्रायः हर मनुष्य के व्यक्तित्व का एक खास पहलू होता है । मैं इसे एक हा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 day ago: गिला शिकवा खूब किया दिन भर पूरे जमाने का फिर भी दिल साफ हुआ नहीं। इतने अल्फाज मुफ्त में खर्च किये फि … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 day ago: किताबों में लिखे शब्द कभी दुनियां नहीं चलाते। इंसानी आदतें चलती अपने जज़्बातों के साथ कभी रोना कभी ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 days ago: हमदर्दी जताने की कला हमें कभी नहीं आई किसी का दर्द देखकर मन रोया मन भर आंसु पर आंखें दरिया न बन पाई। … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 days ago: संतोषाऽमृत-तुप्तानां यत्सुखं शान्तचेतसाम्। न च तद् धनलूब्धानामितश्चयेतश्च धावताम्।। हिंदी में भावार् … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 days ago: क्षान्तिश्चत्कवचेन किं किमनिरभिः क्रोधीऽस्ति चेद्दिहिनां ज्ञातिश्चयेदनलेन किं यदि सहृदद्दिव्यौषधं कि … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 days ago: प्राचीन भारतीय योग साधना पद्धति की तरफ पूरे विश्व का रुझान बढ़ना कोई अस्वाभाविक घटना नहीं है। आज से द … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 days ago: ज़िन्दगी के देखे दो ही रास्ते एक बागों की बहार दूसरा उजाड़ की कगार का. चलती है टांगें मकसद तय करता ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 days ago: यूं तो दर-ब-दर भटकते रहे इस नीले आसमान के नीचे। कभी सोचा न था कि इस दौर में भी छप रहे हैं धरती पर हम … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 days ago: एक के बाद एक सामूहिक ठगी की तीन वारदातें टीवी चैनलों और समाचार पत्रों की सुर्खियां बन गयी हैं। आप यह … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 days ago: श्रृंगार रस का कवि पहुंचा हास्य कवि के पास लगाये अच्छी सलाह की आस और बोला ‘यार, अब यह कैसा जमाना आया … more →
kalapiketan wrote 6 days ago: राधाकी व्यथा (गीत) घनश्याम ठक्कर … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: रामचरित मानस लिखने के 387 वर्ष बाद एक संत ने यह शोध प्रस्तुत किया है कि उसमें व्याकरण और भाषा की तीन … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: वैसे तो उन सज्जन की कोई इतनी अधिक उम्र नहीं थी कि दृष्टिदोष अधिक हो अलबत्ता चश्मा जरूर लगा हुआ था। ए … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: भीड़ में अपनी पहचान ढूंढते हुए क्यों अपना वक्त बर्बाद करते हो. भीड़ जुटाने वाले सौदागरों के लिए हर श … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: भारत में इंटरनेट प्रयोक्ताओं की संख्या सात करोड़ से ऊपर है-इसका सही अनुमान कोई नहीं दे रहा। कई लोग इस … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: वह धर्मजुद्ध से करने निकले जमाने भर की सफाई। अमन का नारा लगाते किया शोर शीतलता के लिये चहुं ओर आग लग … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: भारतीय अध्यात्मिक ज्ञान में व्यक्ति को सदैव सकारात्मक सोच की प्रेरणा दी जाती है। इसके पीछे मुख्य कार … more →