आज जब इंटरनेट पर सब कुछ हिंदीमय होता जा रहा है तो गेम्स भी तो हिंदी में होनी चाहियें। मैंने एक छोटा सा प्रयास किया है। इंटरनेट पर फ्री में उप्लब्ध कुछ जावास्क्रिप्ट गेम्स का मैंने हिंदीकरण किया है। इन… more →
आईनादीपक भारतदीप wrote 1 week ago: जे गरीब पर हित करै, ते रहीम बड़लोग कहाँ सुदामा बापुरो, कृष्ण मिताई जोग कविवर रहीम कहते हैं जो छोटी औ … more →
योगेन्द्र जोशी wrote 4 weeks ago: मैं लोगों के मुख ये उद्गार सुनता हूं कि हिंदी को समृद्ध करने के लिए अन्य भाषाओं के शब्द अपनाने में ह … more →
Shivam Misra wrote 1 month ago: दिमाग को चुस्त बनाती है हिंदी !! यदि आप हिंदी भाषी हैं और आधुनिक सभ्यता के शौकीन होकर बिना जरुरत अंग … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: ज़िन्दगी के देखे दो ही रास्ते एक बागों की बहार दूसरा उजाड़ की कगार का. चलती है टांगें मकसद तय करता ह … more →
Gaizabonts wrote 1 month ago: मंदिर के सामने उनका दफ्तर रस्ते के इस पार मंदिर और उस पार उनका दफ्तर वे जो बन बैठे है हमारे धर्म के … more →
Rahul Katyayan wrote 1 month ago: बरसों से बिना बात जिससे रूठा रहा, उस मुस्कराहट को खींच कर होठों पे लाने की ये कोशिश है सम्मान मैं इत … more →
Rahul Katyayan wrote 1 month ago: बरसों से बिना बात जिससे रूठा रहा, उस मुस्कराहट को खींच कर होठों पे लाने की ये कोशिश है सम्मान मैं इत … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: भारत का शिक्षित वर्ग हमेशा ही मानसिक द्वंद्व में फंसा दिखता है जो पश्चात्य सभ्यता के समर्थन और विरोध … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: उस दिन चिट्ठकार चर्चा का नियमित ईमेल पढ़ा-यह ईमेल इसके सदस्यों को नियमित भेजा जाता है-जिसमें तमिल बच … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अंतर्जाल पर रचनाकर्म कोई आसान काम नहीं है। जो लेखक, कलाकर या कार्टूनिस्ट स्वयं न लिखकर दूसरे को अपनी … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: यमो वैवस्वतो देवो यस्तवैध हृदिस्थितः। तेन चेदविवादस्ते मां गंगा मा कृरून गमः।। हिंदी में भावार्थ-सभी … more →
Gayatri wrote 2 months ago: कुछ तो हो जो ख़ास हो मुझमे भी कोई बात हो दिलो को जो लुभा सके ऐसा कोई अंदाज़ हो यही चाहता है हर कोई की … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: प्रयोग की शक्ति प्रचार से अधिक है। प्रचार योजनाबद्ध और बोझिल होता है जबकि प्रयोग सरल और स्वतः होता ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: न नटा न विटा न गायकाः न च सभ्येतरवादचंचवः। नृपमीक्षितुमत्र के वयं स्तनभारानमिता न योषितः।। हिंदी में … more →
Gaizabonts wrote 5 months ago: किसी एक की मौत किसी दुसरे की ज़िन्दगी बदल देती है, एक जिंदा लाश उस मौत का मतलब समझने में, आस-पास के … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: कौटिल्य के अर्थशास्त्र के अनुसार ——————– प्रमाणश्चधिकश्याप … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: कविता सजधज तैयार हो गयी। उसका पति कवि बाहर स्कूटर पर खड़ा उसका इंतजार कर रहा था। उसे तैयार होता देख स … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: अगर किसी समुदाय का एक जोड़ा अपने किसी दूसरे समुदाय की रीति के अनुसार विवाह करता है तो क्या उस समुदाय … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: नाद रीझि तन देत मृग, नर धन हेत समेत ते रहीम पशु से अधिक, रीझेहु कछू न देत कविवर रहीम कहते हैं कि बां … more →