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इकनॉमिक टाइम्स अब हिंदी में भी
आज सुबह उठ जब बाहर से अखबार उठाये तो एक सुखद एहसास मेरा इंतजार कर रहा था। रोज … more »
आईना
कमरे के अंदर-बाहर की राजनीति होती हैं अलग-अलग-हास्य कविता
दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: सभाकक्ष से बाहर निकलते ही फंदेबाज जोर … more »
चाणक्य नीति:समय के अनुसार न सोचना विपत्तियों को बुलाना
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: जो नीच प्रवृति के लोग दूसरों के दिलों … more »
चाणक्य नीति:सुपात्र को दान देने वाला ही सच्चा वीर
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दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: १.अर्थ कार्यों का मूल होता है राज्यश् … more »
चाणक्य नीति:परनिंदा न करने वाले ही लोकप्रिय होते हैं
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: 1.संसार में किसी को भी मनचाहा सुख प्राप … more »
चाणक्य नीति:अपनी बातें यथासंभव गुप्त रखना चाहिए
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: बुद्धिमान व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने … more »
अंतर्जाल पर पहले चोरी होने जैसा लिखो तो-(हास्य-व्यंग्य)
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दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अंतरजाल पर ब्लोग लिखने वाले कुछ लोगों … more »
भगवान बनाने वाले
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gaizabonts wrote 2 months ago: भगवान बनाने वाले, क्या तेरे मन में समा … more »
वो शहर...
gaizabonts wrote 2 months ago: वो शहर की भीड़ में अपना रास्ता ढूंढना … more »
इकनॉमिक टाइम्स अब हिंदी में भी
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जगदीश भाटिया wrote 2 months ago: आज सुबह उठ जब बाहर से अखबार उठाये तो एक … more »
यह कौनसी अक्लमंदी है-हास्य कविता
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: चंद पलों की खुशी की खातिर पूरी जिन्दगी … more »
मदिरा पीने की अभिलाषा ही बन जाए जब हाला!!!
Rakesh wrote 3 months ago: मदिरा पीने की अभिलाषा ही बन जाए जब हाल … more »
बातें करके रुला ना दीजिएगा...
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Rakesh wrote 3 months ago: बातें करके रुला ना दीजिएगा… यू चुप र … more »
संत कबीर वाणी:शब्द रटने से कोई लाभ नहीं
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: ‘कबीर’ मन फूल्या फिरै,करता हूँ मैं … more »
भ्रम कितना भी चमके, सच की तरह नहीं टिकता-हास्य कविता
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: काला बाजार में अब कुछ नहीं दिखता सारा … more »
तड़प कर देख किसी की चाह मैं
Rakesh wrote 3 months ago: तड़प कर देख किसी की चाह मैं पता चले प … more »
इस दो पल की जिंदगी
Rakesh wrote 3 months ago: इस दो पल की जिंदगी मैं तन्हाई क्यों है, … more »
इसका गम नहीं-कविता
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: उनकी गली से निकलते हुए यूं भी हमें डर ल … more »
मनु स्मृति: दंड का उचित उपयोग न करने वाला अपयश का भागी
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: १. जो व्यक्ति ऐसे लोगों को दंड देता है ज … more »
अंतर्जाल पर सम्मान-हिन्दी हास्य कविता
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: बहुत शोर सुनते थे कोई तरकश चलता ब्लोग … more »
