दूदे-तन्हाई के उस पार क्या है वह ख़ुद है या उसके हुस्न की ज़या है बेवजह किसी की याद यूँ सताती नहीं मेरे दिल ने तुझको पसन्द किया है फ़ैज़ क्या सोचें राहे-मोहब्बत में क़ैस न हो हर आशिक़ इतनी दुआ है सहाब बरसे… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: दूदे-तन्हाई के उस पार क्या है वह ख़ुद है या उसके हुस्न की ज़या है बेवजह किसी की याद यूँ सताती नहीं मे … more →