Blogs about: हिन्दीनेस्ट

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नखरारी नार3 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: पिचकारी खेले ससुरी ऐसे रंग फेंक कर के मचलती कैसे बौछार तीर की निकलती ज्वाला चमकार बिजली की झूमती … more →

Tags: तुकान्त, रचनाकार, मंच

ऐसा बोर सैयां

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: रंग फेका लाल गुलाबी वो वेवलेन्थ की बात करने लगा बुद्धु नादान सैयां आइन्स्टीन को मात करने लगा मैंने छ … more →

Tags: अतुकांत, व्यंग्य, मंच

मौसम

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago:  सर्दी आई तो सिकुड़ गये प्राण छीन  गई हृदय की उष्मा जिसमे पंखुड़ियां खिल खिल जाती थी अबोध चिड़िया मीठे … more →

Tags: अतुकांत

शरद

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: पत्नी के इरादे सी पाषाण बस, नाराज हो कर  देती कंपकंपी बेरुखी ऐसी जैसे निश्चल हवा का  स्पर्श – … more →

Tags: अतुकांत

मित्र !

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago:                            मित्र ! हम तो चले थे उस नकली और मशीनटाइप जिन्दगी से दूर बाइसिकल उठाये सैर … more →

Tags: अतुकांत

निकल कन्दराओं से

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: निकल कन्दराओं से मैने लिखे वेदउपनिषद वात्स्यायन के कामसूत्र सूरतुलसी मीरा के पद सोंच रहा नवनीत ज्ञान … more →

Tags: तुकान्त

मदिरा ढलने पर

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: नजरों से गश आया साकी मदिरा ढलने पर क्या होगा। प्यास बुझाने पानी मांगा अमृत की अब चाह नहीं नन्हा दीपक … more →

Tags: तुकान्त, मंच

बन कविता मुस्कुराती

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: मन मे पीड़ा जब सताती, बन कविता मुस्कुराती दुख बने दो तट अधर के प्यार की वाचा निकलती थपेड़ों मे बन गई प … more →

Tags: तुकान्त, मंच


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