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नखरारी नार
पिचकारी खेले ससुरी ऐसे रंग फेंक कर के मचलती कैसे बौछार तीर की निकलती ज्वाल… more »
हरिहर झा
नखरारी नार
— 3 comments
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: पिचकारी खेले ससुरी ऐसे रंग फेंक कर क … more »
ऐसा बोर सैयां
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: रंग फेका लाल गुलाबी वो वेवलेन्थ की बात … more »
मौसम
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: सर्दी आई तो सिकुड़ गये प्राण छीन गई हृ … more »
शरद
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: पत्नी के इरादे सी पाषाण बस, नाराज हो कर … more »
मित्र !
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: मित्र ! हम तो चले थ … more »
निकल कन्दराओं से
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: निकल कन्दराओं से मैने लिखे वेदउपनिषद … more »
मदिरा ढलने पर
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: नजरों से गश आया साकी मदिरा ढलने पर क्य … more »
बन कविता मुस्कुराती
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: मन मे पीड़ा जब सताती, बन कविता मुस्कुरा … more »
