kalapiketan wrote 1 week ago: जख्म दिल पर (गझल) घनश्याम ठक्कर … more →
kalapiketan wrote 3 weeks ago: राधाकी व्यथा (गीत) घनश्याम ठक्कर … more →
अफ़लातून wrote 4 weeks ago: [ मीनाक्षी पय्याडा के माता - पिता दोनों शुद्ध मलयाली हैं , यानी केरलवासी । उसकी माँ , केरल के कन्नूर … more →
kalapiketan wrote 1 month ago: बीमार तेरे नामके! (गीत) घन-’श्याम’ ठक्कर … more →
kalapiketan wrote 1 month ago: हमारी प्राथमिक शालामें कई अभिप्रेरक कविताएं पढनेकी/गानेकी परंपरा थी. आयु के उस सूर्योदय कालमें कुछ ऐ … more →
kalapiketan wrote 1 month ago: शहनाई (सिंथेसाइझर) वादन संगीतकार और वादकः घनश्याम ठक्कर Happy Diwali Music Composer & Performe … more →
अफ़लातून wrote 1 month ago: जल्दी में प्रियजन मैं बहुत जल्दी में लिख रहा हूं क्योंकि मैं बहुत जल्दी में हूं लिखने की जिसे आप भी … more →
kalapiketan wrote 1 month ago: घूमता है (गझल) घनश्याम ठक्कर … more →
kalapiketan wrote 2 months ago: नवरात्री और डांडियारास घनश्याम ठक्कर … more →
mywordsamish wrote 2 months ago: AARJOO En raat ke andhero ke Yakoot ne na jaane Kitnon ko raushni di hai Shaam ki udasi ke neelam ne … more →
अफ़लातून wrote 2 months ago: रुको कविता रुको समाज, सामाजिकता रुको रुको जन, रुको मन। रुको सोच सौंदर्य रुको ठीक इस क्षण इस पल इस वक … more →
अफ़लातून wrote 2 months ago: आ मैं तुझे खुद में शामिल करता हूँ मेरी रातों में कही जा तू कविता फैलता हुआ तुझे थामने स्थिर होता लील … more →
Grey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष wrote 2 months ago: मेरी पीठ पीछे, शाम तुम ढली जाती हो, मैं जानता हूँ कि तुम चली जाती हो, फ़िसलते-लुढ़कते इस सूरज के साथ, … more →
vaikharee wrote 3 months ago: एक नीला आईना अपनी अपूर्व बुनावट में आलोचना ऐसी है – एक नीला आइना बेठोस१ – कि समय की अनेक … more →
Grey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष wrote 3 months ago: सुबह से ले के शाम तक, जूतों से ले के गेहूं- दाल तक, सब खरीदते-बेचते हैं ठाठ में भीड़ भरी इतवार की हाट … more →
Grey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष wrote 3 months ago: मैं भी भूल गया वो बात, तुम भी भूले ही होगे अपने आप से किए हुए ऐसे वादे, अपना जीवन समर्पित कर देने के … more →
kalapiketan wrote 3 months ago: से ज्यादा मुक्तक-गझल घनश्याम ठक्कर Ghanshyam Thakkar … more →
kalapiketan wrote 3 months ago: निकले गझल घनश्याम ठक्कर … more →
kalapiketan wrote 4 months ago: - हजारों ख्वाहिशें ऐसी गझल मिर्ज़ा गालिब ———————— … more →