Blogs about: हिन्दी पत्रिका

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श्रीगीता संदेश-गैर धर्म गुणवान होने पर भी दु:खदायी (shri gita sandesh)

दीपक भारतदीप wrote 1 hour ago: श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः।। हिंदी में भाव … more →

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जो सभी को पसंद हो वही कहो -हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 16 hours ago: प्रवचन करते समय गुरुजी ने भक्तों को समझाया। ‘‘भ्रष्टाचार करना होता बहुत बड़ा शाप दहेज समाज के लिये ह … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, लघुकथा, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, हास्य व्यंग्य, हिन्दी

बरसात के साथ धार्मिक चालाकी-हिंदी व्यंग्य (hindi vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 1 day ago: अध्यात्म नितांत एक निजी विषय है पर जब उसकी चौराहे पर चर्चा होने लगे तो समझ लो कि कहीं न कहीं उसकी आ … more →

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विदुर नीति-कम ताकत के होते गुस्सा करना तकलीफदेह

दीपक भारतदीप wrote 3 days ago: द्वावेव न विराजेते विपरीतेन कर्मणा। गृहस्थश्च निरारम्भः कार्यवांश्चैव भिक्षुकः।। हिंदी में भावार्थ-न … more →

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आपरेशन तो आसान है -हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 4 days ago: सरकारी अस्पताल में एक सफाई कर्मचारी ने एक तीन साल के बच्चे के गले का आपरेशन कर दिया। उस बच्चे के गले … more →

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छोटा आदमी, बड़ा आदमी-लघुकथा

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: वह शिक्षित बेरोजगार युवक संत के यहां प्रतिदिन जाता था। उसने देखा कि उनके आशीर्वाद से अनेक लोगों की … more →

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इस ब्लाग/पत्रिका ने पार की पाठक संख्या पचास हजार-संपादकीय

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: पाठ पठन/पाठक संख्या पचास हजार पार करने वाला ईपत्रिका इस लेखक का तीसरा ब्लाग/पत्रिका है। इसने हाल ही … more →

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यहां ठग कौन है-हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: ‘एक के तीन’, और ‘दो के छह’ की आवाज कहीं भी सुन लें तो हम भारतीयों के कान खड़े हो जाते हैं यह सोचकर कि … more →

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समाज और खानदान की छबि -दो व्यंग्य क्षणिकायें

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: जिन कहानियों में हर पल क्लेशी पात्र सजाये जाते उसी पर बने नाटक सामाजिक श्रेणी के कहलाते सच है समाज … more →

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भर्तृहरि शतक-बुरे संस्कार बुढ़ापे तक साथ रहते हैं

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि —————— तानींद्रियाण्यविकलानि तदेव ना … more →

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संत कबीर के दोहे: भक्ति और ध्यान एकांत में करें

दीपक भारतदीप wrote 4 weeks ago: चर्चा करु तब चौहटे, ज्ञान करो तब दोय ध्यान करो तब एकिला, और न दूजा कोय संत श्री कबीरदास जी का कथन है … more →

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चाणक्य नीति-बुरे संस्कार वालों के साथ बैठकर खाना भी न खाएं

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: नीति विशारद चाणक्य कहते हैं कि ——————- अर्थार्थीतांश्चय ये शूद्र … more →

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टेलीफोन की हड़ताल का तिलिस्म-व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: देश की एक टेलीफोन कंपनी में कर्मचारियों की हड़ताल हो गयी तो उसके इंटरनेट प्रयोक्ताओं को भारी परेशानी … more →

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विदुर नीति-जैसे दिल में ख्याल होते हैं वैसे ही बनता है नज़रिया

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: द्वेषो न साधुर्भवति न मेधावी न पण्डित। प्रिये शुभानि कार्याणि द्वेष्ये पापानि चैव ह।। हिंदी में भावा … more →

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गूगल ने दो हिन्दी ब्लाग जब्त किये-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: गूगल ने इस लेखक के दो ब्लाग को बिना किसी पूर्व चेतावनी और सूचना के हटा दिया है। यह दो ब्लाग हैं सिंध … more →

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मनुस्मृति- कठिन जगह पर जाने से बचें

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: मनु महाराज कहते हैं कि —————– अधितिष्ठेन केशांस्तु न भस्मास्थिक … more →

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बीच बाज़ार में-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सूरत देखकर ही लोग सिर पर ताज पहनाते हैं किसकी सीरत कौन देखेगा अपने काम पर लोग खुद ही शर्माते हैं. कह … more →

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राम और रावण की भूमिका-लघुकथा

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: वह स्वस्थ्य सुंदर युवक रामलीला मंडली में भगवान श्री राम की भूमिका निभाता था। इसी कारण लोग उसको राम … more →

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बुत सम्मलेन में एक सवाल-लघु कथा

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: वह विशेष बुत अपना भाषाण दे रहा था। उसका विषय था समाज की समस्यायें और उनका हल। उसने अपना भाषण समाप्त … more →

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