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Blogs about: हिन्दी शायरी

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अश्लीलता और श्लीतता में अंतर-हिंदी हास्य व्यंग्य कविताएँ

दीपक भारतदीप wrote 19 hours ago: अश्लीलता और श्लीतता में अंतर कितना रह गया है बस छह इंच के कपड़े का। क्यों इतना रोज छोड़ मचता है खत्म क … more →

Tags: कला, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, bharat, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika

दिल और कविता-हिंदी कविता (dil aur kavita-hindi shayri)

दीपक भारतदीप wrote 4 days ago:   कभी गम तो कभी खुशी कभी दर्द तो कभी हँसी के साथ कविता लिखने का ख्याल किया तब भाषा सज … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कविता, मस्तराम, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शेर, कला, मनोरंजन

समन्दर पीने से भी प्यास नहीं बुझेगी (samandar se bhee pyas nahin bujhegee)2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: सभी लोग हमेशा दूसरे के सुख देखकर मन में अपने लिये उसकी कमी का विचार करते हुए अपने को दुःख देते हैं। … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, हास्य कविता, हास्य व्यंग्य, हिन्दी शेर, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

अय्याशी की चीजों पर वह फ़िदा हो जाते-हिंदी व्यंग्य कविताएँ (khamosh duniya-hindi kavita

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: निरापद रहने की कोशिश निष्क्रिय बना देती है बाहर जलती आग पर दिल को ठंडा रखने की सोच घर को राख बना देत … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, क्षणिका, चिन्तन, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, महत्वपूर्ण ब्लॉग, समाज

खाली ज़ेब का रुआब-हास्य व्यंग्य कविता (khali zeb ka ruaab-hindi hasya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सूखी मन गयी दिवाली क्योंकि जेब थी खाली, ज़माने में अपना रुआब दिखाने के लिए सबसे कह रहे हैं”हैप … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कविता, मस्तराम, समाज, साहित्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शेर

शोर और शांति-हिन्दी कविता (shor aur shanti)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: शोर कर रही भीड़ में शांति कराने के लिये बहुत तेज आवाज में शोर मचाओगे तो तुम भी शांति के मसीहा हो जाओग … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, कविता, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, मस्तराम, व्यंग्य

लहरें देखकर खेलने का मन करता है-हिंदी कविता(lahren aur man-hindi kavita)2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: जिंदगी की इस धारा में किस किसकी नाव पार लगाओगे। समंदर से गहरी है इसकी धारा लहरे इतनी ऊंची कि आकाश का … more →

Tags: Deepak bharatdeep, Deepak bapu, व्यंग्य, हिन्दी, अभिव्यक्ति, अनुभूति, शायरी, शेर, हिन्दी शेर

हमदर्दी बेजान होकर जताते-हिंदी कविता (bezan hamdard-hindi poem

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अक्सर सोचते हैं कि कहीं कोई अपना मिल जाए अपने से हमदर्दी दिखाए मिलते भी हैं खूब लोग यहाँ पर इंसान और … more →

Tags: arebic, Art, अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, मस्तराम, व्यंग्य

दर्द देकर इलाज करने वाले-हिंदी शायरी (hindi poem)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अपना दर्द यूं जमाने को न दिखाओ दवा देकर इलाज करने वाले हर जगह नहीं मिलते हैं। जो अल्फाजों की जादूगरी … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिन्तन, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, शब्द, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

किसी को रात डराती,किसी को दिन-हिन्दी शायरी (din aur raat-hindi shayri)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: हमने देखा था उगता सूरज उन्होने देखा डूबता हुआ वह कर रहे थे चंद्रमा की रौशनी में जश्न मनाने की तैयारी … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य कविता, समाज, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

दीवारों के पीछे से प्रहार-व्यंग्य कविताएं (deevar ke piche se prahar-vyangya kavitaen)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: चेहरे पर रोज नया मुखौटा लगाकर वह सामने चले आते उनकी बहादुरी पर क्या भरोसा करें जो अपने पहचाने जाने क … more →

Tags: अध्यात्म, कला, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शेर

मुर्दाखानों में रौशनी की तलाश-हिंदी साहित्य कविता (The search of light of life in dead mines - Hindi literature, poetry)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: जमींदौज या राख हो चुके इंसानों के राहों पर छपे कदमों को चूम कर उसके निशान जमाने को दिखाते हैं। गुजरत … more →

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मोबाइल मिस काल-हास्य व्यंग्य कविताएँ (miss call on mobile-hinde hasya kavitaen)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: माशुका अब आशिक के लिये हो गयी है मिस काल। वह घंटी बजाकर बंद करती है फिर करता है आशिक उसे काल। वह भी … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, व्यंग्य, हिन्दी, कला, मनोरंजन

इश्क,मोबाइल और मंदी -हास्य व्यंग्य कविता (ishq mobil and economy-hindi comedy satire poem

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: आशिक ने माशुका को समझाया ‘‘मोबाईल पर इतनी बात मत करो मैं नहीं उठा सकता खर्चा हर हफ्ते कपड़े भी न मांग … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, शायरी, शेर, हिंदी साहित्य

कल के बड़े और आज के बच्चे-हिंदी हास्य कवितायें( badi aur bachche-hindi haysa kavita

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: बेटे ने मां से कहा ‘‘मां, मुझे पैसा दो तो कार खरीद कर लाऊं कालिज उससे जाकर अपनी छबि बनाऊं पापा, नोटो … more →

Tags: inglish, अभिव्यक्ति, शायरी, व्यंग्य, India, bharat, अनुभूति, साहित्य, Internet

कवि का टीवी साक्षात्कार-हिन्दी हास्य कविता(intervew of hindi poet-hasya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: कवि ने टीवी एंकर से कहा ‘यह मेरे साक्षात्कार का बेकार नाटक रचाया। तुम सवाल करते हुए जवाब भी बताकर उस … more →

Tags: अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, bharat, अनुभूति, Blogger, Blogging, शब्द, दीपकबापू

दोनों तूफान में फंसे थे-हिंदी कविता(rishton men tufan-hindi poem)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हम दोनों तूफान में फंसे थे उनको सोने की दीवारों का सहारा मिला हम ताश के पतों की तरह ढह गये। अब गुजरत … more →

Tags: कला, मस्तराम, समाज, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शेर, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, hindi bhasakar

समाज सेवा में सदाबहार-हिन्दी हास्य कविता (social service-hindi comedy satire poem)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: बरसात की बूंदें जैसे ही आकाश से जमीन पर आई। अकाल राहत सहायता समिति के सदस्यों के चेहरे पर चिंता घिर … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, bharat

अकेला अक्षर-हिंदी कविता (akshara,shabda & bhasha-hindi kavita)

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: कभी शब्द नहीं बनता अकेला शब्द कभी भाषा नहीं बनता। कई मिलकर बनाते हैं एक भाव समूह जिससे उनका निज परिच … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, नज़रिया, मस्तराम, व्यंग्य


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