Blogs about: हिन्दी शेर

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यह जिंदगी शब्दों का खेल है-हिंदी शायरी1 comment

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: महलों में रहने वाले भी ज्यादा पेट नहीं भर पाते-हिन्दी शायरी आकाश से टपकेगी उम्मीद ताकते हुए क्यों अप … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Deepak bharatdeep, Friends, hindi bhasakar

कुछ लोग खो गए इस शहर की भीड़ में-व्यंग्य कविता4 comments

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: अपने कुछ लोग खो गए इस शहर की भीड़ में उनके पते लिखे हैं बहुत से कागजों पर जो पड़े हैं फाईलों की भीड़ … more →

Tags: हिन्दी, hindi, साहित्य, हास्य कविता, hasya kavita, हिन्दी शायरी, bharatdeep

पाठक संख्या बीस हजार पार करने की पूर्व संध्या पर कविता3 comments

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: मैं अंतर्जाल को एक मायाजाल ही मानता हूं। इसमें मेरे अनुभव अजीब तरह के हैं। अनेक लोग मुझसे मेरे बारे … more →

Tags: Blogroll, hindi journlism, hindi web, hindi epatrika, web duniya, web dunia, hindi nai duinia, hindi megzine, hindi bhasakar

शब्दों के फूल कभी नहीं मुरझाये-हिंदी शायरी1 comment

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: कुछ पाने के लिये दौड़ता है आदमी इधर से उधर देने का ख्याल कभी उसके अंदर नहीं आता भरता है जमाने का साम … more →

Tags: Blogroll, Hindi Poem, Hindi friends, hindi epatrika, web duniya, web dunia, hindi megzine, Deepak bharatdeep, hindi bhasakar

आदमी स्वयं भ्रम में फंसा नजर आता-हिन्दी कविता

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: यूं तो वक्त गुजरता चला जाता पर आदमी साथ चलते पलों को ही अपना जीवन समझ पाता गुजरे पल हो जाते विस्मृत … more →

Tags: हिन्दी, editoriyal, Internet, Friends, bharat, India, सन्देश, साहित्य, Deepak bharatdeep

उनके लिये जज्बात ही होते व्यापार-हिन्दी शायरी 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: कुछ लोग कुछ दिखाने के लिये बन जाते लाचार अपनी वेदना का प्रदर्शन करते हैं सरेआम लुटते हैं लोगों की सं … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, कविता, मस्तराम, व्यंग्य, शायरी, शेर, समाज

चमन की बागडोर है जिसके हाथ वही दुश्मन हो जाता-हिंदी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: लुट जाने का खतरा अब गैरो से नहीं सताता अपनों को ही यह काम अच्छी तरह अब करना आता पहरेदारी अपने घर की … more →

Tags: Blogroll, Hindi Poem, Hindi friends, hindi web, hindi epatrika, web duniya, web dunia, Deepak bharatdeep, hindi sahity

वफा मुफ्त में नहीं मिलती-हिंदी शायरी4 comments

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: वफा अब मुफ्त में नहीं मिलती अगर दाम देने की ताकत हो पास तो बेचने वाले सौदागरो की भीड़ दिखती ओ बाजार … more →

Tags: अनुभूति, कला, मस्तराम, व्यंग्य, साहित्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी शायरी, Blogging, Blogroll

स्वयं पढ़ा कुछ नहीं, दूसरों को लिखना सिखाते हैं-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: आया फंदेबाज और एक किताब हाथ में थमाते हुए बोला ‘दीपक बापू, लो पकड़ लो यह किताब ‘लिखने के नुस्खें सीख … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, कला, कविता, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य

अब रास्ते से निकलने के लिये तरसे-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: बरसों से कभी ऐसे मेघ नहीं बरसे हमेशा रहा जल का अकाल हम पानी की बूंद बूंद को तरसे बहुत सारी शायरी प्य … more →

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खबरों की खबर देने वाले-व्यंग्य कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: खबरों की खबर वह रखते हैं अपनी खबर हमेशा ढंकते हैं दुनियां भर के दर्द को अपनी खबर बनाने वाले अपने वास … more →

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क्या फायदा विषय का पहाड़ खोदने से-हास्य कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: समाज के शिखर पर बैठे लोग हांकते हैं ऐसे आदमी को जैसे भेड़-बकरी हों जो न बोले न कहे न देखे उनके काले … more →

Tags: मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हास्य कविता, हिन्दी शायरी, Blogging, Blogroll, Deepak bapu

गीत संगीत की महफिल की बजाय महायुद्ध सजाते-हास्य कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: गीत और संगीत से दिल मिल जाते हैं पर अब तो उसकी परख के लिये प्रतियोगितायें को अब वह महायुद्ध कहकर जमक … more →

Tags: आलेख, ज्ञान, मस्तराम, व्यंग्य, शायरी, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी शायरी

चिंतन शिविर-हास्य कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने संगठन का चिंतन शिविर उन्होंने किसी मैदान की बजाय अब एक होटल में लगाया जहां सभी ने मिलकर अपना स … more →

Tags: कला, कविता, जजबात, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी शायरी

ख्याल तो हैं जलचर की तरह-हिंदी शायरी2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मन का समंदर है गहरा जहां ख्याल तैरते हैं जलचर की तरह कुछ मछलियां सुंदर लगती हैं कुछ लगते हैं खौफनाक … more →

Tags: अनुभूति, कला, कविता, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी

मैं नहीं हूं कोई सिकंदर-हिंदी शायरी1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: किसे मित्र कहें किसे शत्रू आदमी बंटा हुआ है अपने अंदर सिमट जाता है अपने ख्यालों में एक तालाब की तरह … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, कविता, जजबात, मस्तराम, शायरी, समाज, साहित्य

इंसान कभी चिराग नहीं हो सकते-हिन्दी शायरी 4 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: यूं तो चमकता चाँद देखकर अपना दिल बहला लेते पर जब आकाश में नहीं दिखता वह छोटा चिराग जला लेते हैं जिन् … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, कविता, जजबात, मस्तराम, समाज, साहित्य, हास्य कविता, हास्य व्यंग्य

बेजान चीजों की नीलामी, जिंदगी की नीलामी नहीं होती-हास्य कविता3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापू तुम्हारे हिट होने का एक नुस्खा लाया हूं सफलता बतलाने वाले डाक्टर से स … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, कविता, जजबात, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य

अकेले होने के गम में इसलिये रोते रहे-कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: भीड़ में हमेशा खोते रहे अपने से न मिलने के गम में रोते रहे नहीं ढूंढा अपने को अंदर आदमी होकर भी रहा … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, कविता, जजबात, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य


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