Lost your password?

Blogs about: हिन्दी शेर

Featured Blog

दिल और कविता-हिंदी कविता (dil aur kavita-hindi shayri)

दीपक भारतदीप wrote 4 days ago:   कभी गम तो कभी खुशी कभी दर्द तो कभी हँसी के साथ कविता लिखने का ख्याल किया तब भाषा सज … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कविता, मस्तराम, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी, कला, मनोरंजन

समन्दर पीने से भी प्यास नहीं बुझेगी (samandar se bhee pyas nahin bujhegee)2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: सभी लोग हमेशा दूसरे के सुख देखकर मन में अपने लिये उसकी कमी का विचार करते हुए अपने को दुःख देते हैं। … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, हास्य कविता, हास्य व्यंग्य, हिन्दी शायरी, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

खाली ज़ेब का रुआब-हास्य व्यंग्य कविता (khali zeb ka ruaab-hindi hasya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सूखी मन गयी दिवाली क्योंकि जेब थी खाली, ज़माने में अपना रुआब दिखाने के लिए सबसे कह रहे हैं”हैप … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कविता, मस्तराम, समाज, साहित्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी

लहरें देखकर खेलने का मन करता है-हिंदी कविता(lahren aur man-hindi kavita)2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: जिंदगी की इस धारा में किस किसकी नाव पार लगाओगे। समंदर से गहरी है इसकी धारा लहरे इतनी ऊंची कि आकाश का … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, शायरी, शेर, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी

दीवारों के पीछे से प्रहार-व्यंग्य कविताएं (deevar ke piche se prahar-vyangya kavitaen)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: चेहरे पर रोज नया मुखौटा लगाकर वह सामने चले आते उनकी बहादुरी पर क्या भरोसा करें जो अपने पहचाने जाने क … more →

Tags: अध्यात्म, कला, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी

दोनों तूफान में फंसे थे-हिंदी कविता(rishton men tufan-hindi poem)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हम दोनों तूफान में फंसे थे उनको सोने की दीवारों का सहारा मिला हम ताश के पतों की तरह ढह गये। अब गुजरत … more →

Tags: कला, मस्तराम, समाज, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, hindi bhasakar

यह जिंदगी शब्दों का खेल है-हिंदी शायरी1 comment

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: महलों में रहने वाले भी ज्यादा पेट नहीं भर पाते-हिन्दी शायरी आकाश से टपकेगी उम्मीद ताकते हुए क्यों अप … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Deepak bharatdeep, Friends, hindi bhasakar

कुछ लोग खो गए इस शहर की भीड़ में-व्यंग्य कविता4 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने कुछ लोग खो गए इस शहर की भीड़ में उनके पते लिखे हैं बहुत से कागजों पर जो पड़े हैं फाईलों की भीड़ … more →

Tags: हिन्दी, hindi, साहित्य, हास्य कविता, hasya kavita, हिन्दी शायरी, bharatdeep

पाठक संख्या बीस हजार पार करने की पूर्व संध्या पर कविता3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मैं अंतर्जाल को एक मायाजाल ही मानता हूं। इसमें मेरे अनुभव अजीब तरह के हैं। अनेक लोग मुझसे मेरे बारे … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, कविता, मस्तराम, शायरी, शेर, समाज, साहित्य

शब्दों के फूल कभी नहीं मुरझाये-हिंदी शायरी1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कुछ पाने के लिये दौड़ता है आदमी इधर से उधर देने का ख्याल कभी उसके अंदर नहीं आता भरता है जमाने का साम … more →

Tags: कला, कविता, व्यंग्य, शायरी, शेर, समाज, साहित्य, हास्य कविता, हास्य व्यंग्य

आदमी स्वयं भ्रम में फंसा नजर आता-हिन्दी कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: यूं तो वक्त गुजरता चला जाता पर आदमी साथ चलते पलों को ही अपना जीवन समझ पाता गुजरे पल हो जाते विस्मृत … more →

Tags: हिन्दी, editoriyal, Internet, Friends, bharat, India, सन्देश, साहित्य, Deepak bharatdeep

उनके लिये जज्बात ही होते व्यापार-हिन्दी शायरी 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कुछ लोग कुछ दिखाने के लिये बन जाते लाचार अपनी वेदना का प्रदर्शन करते हैं सरेआम लुटते हैं लोगों की सं … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, कविता, मस्तराम, व्यंग्य, शायरी, शेर, समाज

चमन की बागडोर है जिसके हाथ वही दुश्मन हो जाता-हिंदी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: लुट जाने का खतरा अब गैरो से नहीं सताता अपनों को ही यह काम अच्छी तरह अब करना आता पहरेदारी अपने घर की … more →

Tags: हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी, Blogging, Blogroll, Deepak bharatdeep, E-patrika, Family, Friends, hindi culture

वफा मुफ्त में नहीं मिलती-हिंदी शायरी4 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: वफा अब मुफ्त में नहीं मिलती अगर दाम देने की ताकत हो पास तो बेचने वाले सौदागरो की भीड़ दिखती ओ बाजार … more →

Tags: अनुभूति, कला, मस्तराम, व्यंग्य, साहित्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी शायरी, Blogging, Blogroll

स्वयं पढ़ा कुछ नहीं, दूसरों को लिखना सिखाते हैं-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आया फंदेबाज और एक किताब हाथ में थमाते हुए बोला ‘दीपक बापू, लो पकड़ लो यह किताब ‘लिखने के नुस्खें सीख … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, कला, कविता, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य

अब रास्ते से निकलने के लिये तरसे-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बरसों से कभी ऐसे मेघ नहीं बरसे हमेशा रहा जल का अकाल हम पानी की बूंद बूंद को तरसे बहुत सारी शायरी प्य … more →

Tags: कला, जजबात, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी शायरी, Blogging

खबरों की खबर देने वाले-व्यंग्य कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: खबरों की खबर वह रखते हैं अपनी खबर हमेशा ढंकते हैं दुनियां भर के दर्द को अपनी खबर बनाने वाले अपने वास … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आलेख, कला, जजबात, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हास्य कविता

क्या फायदा विषय का पहाड़ खोदने से-हास्य कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: समाज के शिखर पर बैठे लोग हांकते हैं ऐसे आदमी को जैसे भेड़-बकरी हों जो न बोले न कहे न देखे उनके काले … more →

Tags: मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हास्य कविता, हिन्दी शायरी, Blogging, Blogroll, Deepak bapu

गीत संगीत की महफिल की बजाय महायुद्ध सजाते-हास्य कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: गीत और संगीत से दिल मिल जाते हैं पर अब तो उसकी परख के लिये प्रतियोगितायें को अब वह महायुद्ध कहकर जमक … more →

Tags: आलेख, ज्ञान, मस्तराम, व्यंग्य, शायरी, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी शायरी


Have your say. Start a blog.

See our free features →

Related Tags
All →

Follow this tag via RSS