माशुका अब आशिक के लिये हो गयी है मिस काल। वह घंटी बजाकर बंद करती है फिर करता है आशिक उसे काल। वह भी क्या करे आशिक ने जीवन भर सुनने के लिये मोबाइल तो दिया मगर अब नहीं भरवा कर दे रहा वार्तालाप समय कोई प… more →
***दीपक भारतदीप की हिंदी पत्रिका*** ***Deepak Bharatdeep ki Hindi patrika***दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: तथैव योगविहितं यत्तु कर्म नि सिध्यति। उपाययुक्तं मेधावी न तव्र गलपयेन्मनः।। हिंदी में भावार्थ-अच्छे … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: छायागृह में चलचित्र के एक दृश्य में नायक घायल हो गया तो एक महिला दर्शक रोने लगी। तब पास में बैठी दूस … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: मिथ्यापेतानि कर्माण सिध्येवुर्यानि भारत। अनुपायवुक्तानि मा स्म तेष मनः कृथाः।। हिंदी में भावार्थ-मिथ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: नीति विशारद चाणक्य महाराज कहते हैं कि ———————— … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: माशुका अब आशिक के लिये हो गयी है मिस काल। वह घंटी बजाकर बंद करती है फिर करता है आशिक उसे काल। वह भी … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: बेटे ने मां से कहा ‘‘मां, मुझे पैसा दो तो कार खरीद कर लाऊं कालिज उससे जाकर अपनी छबि बनाऊं पापा, नोटो … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः।। हिंदी में भाव … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: संतत संपति जानि कै, सबको सब कुछ देत दीन बंधु बिन दीन की, कौ रहीम सुधि लेत कविवर रहीम कहते हैं कि जिन … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: क्यों डरे हो काफिला लुट गया फिर बनेगा। यह तूफान उड़ा ले गया तंबू फिर तनेगा। हार या जीत का चक्र चलता ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: द्वेषो न साधुर्भवति न मेधावी न पण्डित। प्रिये शुभानि कार्याणि द्वेष्ये पापानि चैव ह।। हिंदी में भावा … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: रहिमन खोटी आदि की, सो परिनाम लखाय जैसे दीपक तम भखै, कज्जल वमन कराय कविवर रहीम कहते हैं कि बुराई होने … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: सूरत देखकर ही लोग सिर पर ताज पहनाते हैं किसकी सीरत कौन देखेगा अपने काम पर लोग खुद ही शर्माते हैं. कह … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: स्वायत्तेमेकांतगुणं विधात्रा विनिर्मितम् छादनमज्ञतायाः। विशेषतः सर्वविदां समाजे विभूषणं मौनमपण्डितना … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: कमरों में बंद दौलत लूटकर लुटेरे जा सके यहां से कितनी दूर। उसकी चकाचैंध में रौशनी खो बैठे उनके नूर। अ … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि ——————- स्वायत्तेमेकांतगुणं विधात्रा … more →
kalapiketan wrote 6 months ago: बाढका खतरा करदो – गझल – घनश्याम ठक्कर Oasis Links ગુજરાતી કવિતા અને સંગીત Blog – Ghanshyam Thakk … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: न निर्मितः केन न दृष्टपूर्वः न श्रूयते हेममयः कुरंगः। तथापि तृष्णा रघुनंदनस्य विनाशकाले विपरीत बुद्ध … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: कविवर रहीम कहते हैं रहिमन आलस भजन में, विषय सुखहिं लपटाय घास चरै पसु स्वाद तै, गुरु गुलिलाएं खाय मनु … more →
Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: नींद से जागो सूली चढ़कर शहीद भगत ने दुनिया को ललकारा है, नींद से जागो ऐ मज़लूमों सारा देश तुम्हारा ह … more →