श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः।। हिंदी में भावार्थ-श्रीगीता में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि अपने धर्म से पराया धर्म श्रेष्ठ लगता है तब उसको कभी श… more →
दीपक भारतदीप की ई-पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 6 days ago: श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः।। हिंदी में भाव … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 days ago: संतत संपति जानि कै, सबको सब कुछ देत दीन बंधु बिन दीन की, कौ रहीम सुधि लेत कविवर रहीम कहते हैं कि जिन … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: क्यों डरे हो काफिला लुट गया फिर बनेगा। यह तूफान उड़ा ले गया तंबू फिर तनेगा। हार या जीत का चक्र चलता ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: द्वेषो न साधुर्भवति न मेधावी न पण्डित। प्रिये शुभानि कार्याणि द्वेष्ये पापानि चैव ह।। हिंदी में भावा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: रहिमन खोटी आदि की, सो परिनाम लखाय जैसे दीपक तम भखै, कज्जल वमन कराय कविवर रहीम कहते हैं कि बुराई हो … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सूरत देखकर ही लोग सिर पर ताज पहनाते हैं किसकी सीरत कौन देखेगा अपने काम पर लोग खुद ही शर्माते हैं. कह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: स्वायत्तेमेकांतगुणं विधात्रा विनिर्मितम् छादनमज्ञतायाः। विशेषतः सर्वविदां समाजे विभूषणं मौनमपण्डितना … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: कमरों में बंद दौलत लूटकर लुटेरे जा सके यहां से कितनी दूर। उसकी चकाचैंध में रौशनी खो बैठे उनके नूर। अ … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि ——————- स्वायत्तेमेकांतगुणं विधात्रा … more →
kalapiketan wrote 2 months ago: बाढका खतरा करदो – गझल – घनश्याम ठक्कर Oasis Links ગુજરાતી કવિતા અને સંગીત Blog – Gha … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: न निर्मितः केन न दृष्टपूर्वः न श्रूयते हेममयः कुरंगः। तथापि तृष्णा रघुनंदनस्य विनाशकाले विपरीत बुद्ध … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: कविवर रहीम कहते हैं रहिमन आलस भजन में, विषय सुखहिं लपटाय घास चरै पसु स्वाद तै, गुरु गुलिलाएं खाय म … more →
Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 months ago: नींद से जागो सूली चढ़कर शहीद भगत ने दुनिया को ललकारा है, नींद से जागो ऐ मज़लूमों सारा देश तुम्हारा … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: नीति विशारद चाणक्य महाराज कहते हैं कि ———————— … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: शोला कहो या शबनम मोहब्बत के जज्बातों के इजहार में हर लफ्ज़ है कम। मगर जिदंगी में सफर में खूबसूरत हमसफ … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: आसमान से जमीन पर आते हुए लिखा लाये हैं वह अपनी रंगीन तकदीर। न ख्याल उनका अपना न कोई सोच अपनी पर जमान … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: उन्हें और क्या चाहिये जिनका दौलत करती हो सम्मान। तलवे चाटने के लिये कुछ पल मिल उनके पांव मिलने पर लो … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हरियाली के कायदे कभी रेगिस्तान में नहीं चलते। हरी दूब में चलते हों जो पांव रेत की धरती पर बुरी तरह ज … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: दरवाजे पर दस्तक होते ही ब्लागर कंप्यूटर से उठा और बाहर आया तो उसे सीखचों के बाहर दूसरा ब्लागर दिखाई … more →