Blogs about: हिन्दी साहित्य

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श्रीगीता संदेश-गैर धर्म गुणवान होने पर भी दु:खदायी (shri gita sandesh)

दीपक भारतदीप wrote 6 days ago: श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः।। हिंदी में भाव … more →

Tags: आलेख, मस्तराम, संस्कार, समाज, साहित्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Blogroll

रहीम के दोहे-अमीर को पैसा देने के लिए सब तैयार,गरीब से इंकार (rahim ke dohe)

दीपक भारतदीप wrote 6 days ago: संतत संपति जानि कै, सबको सब कुछ देत दीन बंधु बिन दीन की, कौ रहीम सुधि लेत कविवर रहीम कहते हैं कि जिन … more →

Tags: adhyatm, alekh, Anubhuti, चिंतन, दीपक भारतदीप, धर्म, मस्त राम, मस्तराम, शब्द

तंबू फिर तनेगा-त्रिपदम

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: क्यों डरे हो काफिला लुट गया फिर बनेगा। यह तूफान उड़ा ले गया तंबू फिर तनेगा। हार या जीत का चक्र चलता ह … more →

Tags: इंटरनेट, मस्त राम, शायरी, हास्य, हिन्दी, darshan, Deepak bharatdeep, mast ram, web bhaskar

विदुर नीति-जैसे दिल में ख्याल होते हैं वैसे ही बनता है नज़रिया

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: द्वेषो न साधुर्भवति न मेधावी न पण्डित। प्रिये शुभानि कार्याणि द्वेष्ये पापानि चैव ह।। हिंदी में भावा … more →

Tags: आचरण, आध्यात्म, कला, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging

रहीम दास के दोहे-बुराई का नतीजा सामने जरूर आता है

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: रहिमन खोटी आदि की, सो परिनाम लखाय जैसे दीपक तम भखै, कज्जल वमन कराय कविवर रहीम कहते हैं कि बुराई हो … more →

Tags: अनुभूति, रहीम, सन्देश, हिन्दी, Deepak bharatdeep, hindi litreture, India, inlglish, Internet

बीच बाज़ार में-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सूरत देखकर ही लोग सिर पर ताज पहनाते हैं किसकी सीरत कौन देखेगा अपने काम पर लोग खुद ही शर्माते हैं. कह … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, मातृभाषा, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

भर्तृहरि शतकः खामोश रहने से होते ढेर सारे लाभ 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: स्वायत्तेमेकांतगुणं विधात्रा विनिर्मितम् छादनमज्ञतायाः। विशेषतः सर्वविदां समाजे विभूषणं मौनमपण्डितना … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, समाज, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, Hindi Blogging

क्यों जंग का बिगुल बजा रहे हो-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: कमरों में बंद दौलत लूटकर लुटेरे जा सके यहां से कितनी दूर। उसकी चकाचैंध में रौशनी खो बैठे उनके नूर। अ … more →

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भर्तृहरि नीति शतक-भगवान ने दिया है मौन रहने का गुण

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि ——————- स्वायत्तेमेकांतगुणं विधात्रा … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, चिंतन, दीपक भारतदीप, सन्देश, साहित्य, हिन्दी, bhruthari shatak

बाढका खतरा करदो (गझल) घनश्याम ठक्कर 1 comment

kalapiketan wrote 2 months ago: बाढका खतरा करदो – गझल –   घनश्याम ठक्कर   Oasis Links ગુજરાતી કવિતા અને સંગીત Blog – Gha … more →

Tags: Oasis Thacker, घनश्याम ठक्कर, हिन्दी कविता, कविता, हिन्दी ब्लोग, हिन्दी नेट, Gazal, हिन्दी गझल, गझल

चाणक्य नीतिः महल पर बैठने से कौआ गरुड़ नहीं हो जाता।

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: न निर्मितः केन न दृष्टपूर्वः न श्रूयते हेममयः कुरंगः। तथापि तृष्णा रघुनंदनस्य विनाशकाले विपरीत बुद्ध … more →

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रहीम दास के दोहे: पशु अपना हित करने वाला गुड़ कभी नहीं खाते

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: कविवर रहीम कहते हैं रहिमन आलस भजन में, विषय सुखहिं लपटाय घास चरै पसु स्वाद तै, गुरु गुलिलाएं खाय म … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आलेख, दीपक भारतदीप, दोहे, मस्त राम, सन्देश, साहित्य, हिन्दी, bharat

नींद से जागो

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 months ago: नींद से जागो सूली चढ़कर शहीद भगत ने दुनिया को ललकारा है, नींद से जागो ऐ मज़लूमों सारा देश तुम्हारा … more →

Tags: आह्वान, क्रांति, भगत सिंह, मजदूर, ललकार, समाजवाद, सर्वहारा, शिक्षा, शोषण-उत्पीड़न

चाणक्य नीतिः अपने घर के अन्दर की बात बाहर न कहें

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: नीति विशारद चाणक्य महाराज कहते हैं कि ———————— … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, चाणक्य नीति, मस्तराम, संस्कार, साहित्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging

चेहरे कब तक बनावटी सामान से सजाओगे-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: शोला कहो या शबनम मोहब्बत के जज्बातों के इजहार में हर लफ्ज़ है कम। मगर जिदंगी में सफर में खूबसूरत हमसफ … more →

Tags: hasya -vyangya, Kavita, Shayri, writer, Hindi writing, hindi kavita, vyangya kavita, India, Deepak bharatdeep

जोरदार और रंगीन तकदीर वह लिखा लाये-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: आसमान से जमीन पर आते हुए लिखा लाये हैं वह अपनी रंगीन तकदीर। न ख्याल उनका अपना न कोई सोच अपनी पर जमान … more →

Tags: hasya kavita, hasya vyang, aritile in hindi, Hindi writing, vyangya kavita, समाज, India, Deepak bharatdeep, दीपक भारतदीप

सम्मान और अपमान-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: उन्हें और क्या चाहिये जिनका दौलत करती हो सम्मान। तलवे चाटने के लिये कुछ पल मिल उनके पांव मिलने पर लो … more →

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हरियाली के कायदे रेगिस्तान में नहीं चलते-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हरियाली के कायदे कभी रेगिस्तान में नहीं चलते। हरी दूब में चलते हों जो पांव रेत की धरती पर बुरी तरह ज … more →

Tags: हिन्दी, अभिव्यक्ति, व्यंग्य, Life, Internet, Education, Love, hindi bharat, web dunia

उसने बस यही कहा ‘अच्छा लिखो’(हास्य व्यंग्य)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: दरवाजे पर दस्तक होते ही ब्लागर कंप्यूटर से उठा और बाहर आया तो उसे सीखचों के बाहर दूसरा ब्लागर दिखाई … more →

Tags: writing, हिन्दी, inglish, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, India, अनुभूति, आलेख, साहित्य


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