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Blogs about: हिन्दी साहित्य

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हिंदी आध्यात्मिक सन्देश-बेकार के कम न करें तो ही ठीक (vidur niti-bekar kam n karen)

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: तथैव योगविहितं यत्तु कर्म नि सिध्यति। उपाययुक्तं मेधावी न तव्र गलपयेन्मनः।। हिंदी में भावार्थ-अच्छे … more →

Tags: arebic, अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्त राम, शब्द

घर का रोना-हास्य व्यंग्य कविता (ghar ka rona-vyangya kavita

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: छायागृह में चलचित्र के एक दृश्य में नायक घायल हो गया तो एक महिला दर्शक रोने लगी। तब पास में बैठी दूस … more →

Tags: arbic, अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिन्तन, दीपक भारतदीप, व्यंग्य, शब्द, हास्य, हिंदी पत्रिका

विदुर दर्शन-सात्विक कार्य सिद्ध न हो भी चिंता नहीं

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: मिथ्यापेतानि कर्माण सिध्येवुर्यानि भारत। अनुपायवुक्तानि मा स्म तेष मनः कृथाः।। हिंदी में भावार्थ-मिथ … more →

Tags: हिन्दी, संस्कार, inglish, संपादकीय, आध्यात्म, India, bhaarat, आलेख, हिंदी साहित्य

चाणक्य नीति-कुविचारी नारी से तो कोई साथ न हो अच्छा (chankya niti-kuvichari nari ka sath

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: नीति विशारद चाणक्य महाराज कहते हैं कि ———————— … more →

Tags: inglish, चिन्तन, bharat, India, अभिव्यक्ति, अनुभूति, शब्द, इंटरनेट, Deepak bharatdeep

मोबाइल मिस काल-हास्य व्यंग्य कविताएँ (miss call on mobile-hinde hasya kavitaen)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: माशुका अब आशिक के लिये हो गयी है मिस काल। वह घंटी बजाकर बंद करती है फिर करता है आशिक उसे काल। वह भी … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी शायरी, कला

कल के बड़े और आज के बच्चे-हिंदी हास्य कवितायें( badi aur bachche-hindi haysa kavita

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: बेटे ने मां से कहा ‘‘मां, मुझे पैसा दो तो कार खरीद कर लाऊं कालिज उससे जाकर अपनी छबि बनाऊं पापा, नोटो … more →

Tags: inglish, अभिव्यक्ति, शायरी, व्यंग्य, India, bharat, अनुभूति, साहित्य, Internet

श्रीगीता संदेश-गैर धर्म गुणवान होने पर भी दु:खदायी (shri gita sandesh)

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः।। हिंदी में भाव … more →

Tags: आलेख, मस्तराम, संस्कार, समाज, साहित्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Blogroll

रहीम के दोहे-अमीर को पैसा देने के लिए सब तैयार,गरीब से इंकार (rahim ke dohe)

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: संतत संपति जानि कै, सबको सब कुछ देत दीन बंधु बिन दीन की, कौ रहीम सुधि लेत कविवर रहीम कहते हैं कि जिन … more →

Tags: हिन्दी, चिंतन, jagran, alekh, adhyatm, Anubhuti, India, धर्म, शब्द

तंबू फिर तनेगा-त्रिपदम

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: क्यों डरे हो काफिला लुट गया फिर बनेगा। यह तूफान उड़ा ले गया तंबू फिर तनेगा। हार या जीत का चक्र चलता ह … more →

Tags: इंटरनेट, मस्त राम, शायरी, हास्य, हिन्दी, darshan, Deepak bharatdeep, mast ram, web bhaskar

विदुर नीति-जैसे दिल में ख्याल होते हैं वैसे ही बनता है नज़रिया

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: द्वेषो न साधुर्भवति न मेधावी न पण्डित। प्रिये शुभानि कार्याणि द्वेष्ये पापानि चैव ह।। हिंदी में भावा … more →

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रहीम दास के दोहे-बुराई का नतीजा सामने जरूर आता है

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: रहिमन खोटी आदि की, सो परिनाम लखाय जैसे दीपक तम भखै, कज्जल वमन कराय कविवर रहीम कहते हैं कि बुराई होने … more →

Tags: अनुभूति, रहीम, सन्देश, हिन्दी, Deepak bharatdeep, hindi litreture, India, inlglish, Internet

बीच बाज़ार में-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: सूरत देखकर ही लोग सिर पर ताज पहनाते हैं किसकी सीरत कौन देखेगा अपने काम पर लोग खुद ही शर्माते हैं. कह … more →

Tags: inglish, हिन्दी, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, Friends, मातृभाषा, web duniya, web dunia

भर्तृहरि शतकः खामोश रहने से होते ढेर सारे लाभ 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: स्वायत्तेमेकांतगुणं विधात्रा विनिर्मितम् छादनमज्ञतायाः। विशेषतः सर्वविदां समाजे विभूषणं मौनमपण्डितना … more →

Tags: Hindi Education, Hindi writing, India, web duniya, Hindi vews, hindi life, hindi megzine, hindi thinking, inglish

क्यों जंग का बिगुल बजा रहे हो-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: कमरों में बंद दौलत लूटकर लुटेरे जा सके यहां से कितनी दूर। उसकी चकाचैंध में रौशनी खो बैठे उनके नूर। अ … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, इंटरनेट, दीपक भारतदीप, व्यंग्य, शब्द, शायरी, हिंदी पत्रिका, हिन्दी

भर्तृहरि नीति शतक-भगवान ने दिया है मौन रहने का गुण

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि ——————- स्वायत्तेमेकांतगुणं विधात्रा … more →

Tags: हिन्दी, आलेख, चिंतन, अभिव्यक्ति, jagran, Internet, hindu, India, सन्देश

बाढका खतरा करदो (गझल) घनश्याम ठक्कर 1 comment

kalapiketan wrote 6 months ago: बाढका खतरा करदो – गझल –   घनश्याम ठक्कर   Oasis Links ગુજરાતી કવિતા અને સંગીત Blog – Ghanshyam Thakk … more →

Tags: Oasis Thacker, घनश्याम ठक्कर, हिन्दी कविता, कविता, हिन्दी ब्लोग, हिन्दी नेट, Gazal, हिन्दी गझल, गझल - घनश्याम ठक्कर

चाणक्य नीतिः महल पर बैठने से कौआ गरुड़ नहीं हो जाता।

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: न निर्मितः केन न दृष्टपूर्वः न श्रूयते हेममयः कुरंगः। तथापि तृष्णा रघुनंदनस्य विनाशकाले विपरीत बुद्ध … more →

Tags: writer, aritile in hindi, hindi article, Hindi writing, Friends, Family, India, Blogger, Deepak bharatdeep

रहीम दास के दोहे: पशु अपना हित करने वाला गुड़ कभी नहीं खाते

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: कविवर रहीम कहते हैं रहिमन आलस भजन में, विषय सुखहिं लपटाय घास चरै पसु स्वाद तै, गुरु गुलिलाएं खाय मनु … more →

Tags: हिन्दी, आलेख, अभिव्यक्ति, jagran, Internet, rahim, bharat, सन्देश, दोहे

नींद से जागो

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: नींद से जागो सूली चढ़कर शहीद भगत ने दुनिया को ललकारा है, नींद से जागो ऐ मज़लूमों सारा देश तुम्हारा ह … more →

Tags: आह्वान, क्रांति, भगत सिंह, मजदूर, ललकार, समाजवाद, सर्वहारा, शिक्षा, शोषण-उत्पीड़न


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