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आम इंसान की जिंदगी-हिन्दी शायरी (life of comman man-hindi poem)

दीपक भारतदीप wrote 6 days ago:  जो तुम भी चाहोगे इंसानी बुत बनकर बड़े कहलाओगे। सीख लो नटों के इशारों की डोर पर नाचना जमाने में … more →

Tags: arebic, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, शायरी, साहित्य, कला, मनोरंजन, मस्ती, व्यंग कविता

हिन्दू अध्यात्मिक संदेश-विद्वान विपत्तियों का पहले अनुमान कर लेते है (hindi dharm sandesh-vidavan aur vipatti)2 comments

दीपक भारतदीप wrote 6 days ago: अशिक्षितनयः सिंहो हन्तीम केवलं बलात्। तच्च धीरो नरस्तेषां शतानि जतिमांजयेत्।। हिंदी में भावार्थ-सिंह … more →

Tags: hindi epatrika, hindi bhasakar, hindi jagran, अभिव्यक्ति, अनुभूति, आलेख, अध्यात्म, Friends, E-patrika

हिन्दू अध्यात्मिक संदेश-धीरज न रखने से पतन होता है (dhiraj aur jivan-hindu adhyatmik sandesh)

दीपक भारतदीप wrote 6 days ago: कुमिकीटवधोहत्या मद्यानुगतभोजनम्। फलेन्धनकुसुमस्तयमधैर्य च मलावहम्।। हिंदी में भावार्थ-कोई भी मनुष्य … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आध्यात्म, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, मातृभाषा, समाज सेवा, हिन्दी पत्रिका, Blogging

हिन्दू अध्यात्मिक संदेश-मांसाहारी से मित्रता भी भक्ति का नाश करती है (hindu ahdyatmik sandesh-meat and religion)

दीपक भारतदीप wrote 6 days ago: मासांहारी मानवा, परतछ राछस जान। ताकी संगति मति करै, होय भक्ति में हान।। संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते … more →

Tags: अध्यात्म, अभिव्यक्ति, कबीर, मनोरंजन, मस्तराम, हिंदी पत्रिका, adhyatm, आध्यात्म, कला

धर्म और कमाई-हास्य साहित्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago:   धर्म बन गयी है शय बेचा जाता है इसे बाज़ार में, सबसे बड़े सौदागर पीर कहलाते हैं. भूख, गरीबी, बे … more →

Tags: अभिव्यक्ति, ताल-बेताल, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य कविता, समाज, हिन्दी पत्रिका, bharat

पर्दे के पीछे-हिन्दी साहित्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: सच कहते हैं जिंदगी के फैसले कभी जंग से नहीं होते। पर्दे के पीछे तय हो जाते फैसले ले देकर कटवाते है व … more →

Tags: Deepak bharatdeep, Deepak bapu, व्यंग्य, अभिव्यक्ति, अनुभूति, हिन्दी शेर, हिन्दी शायरी, Friends, E-patrika

किस जमाने की माशुका हो-हिन्दी हास्य कविता (hindi poem on love)

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago:  माशुका ने पूछा आशिक से ‘अगर शादी के बाद मैं मर गयी तो क्या मेरी याद में ताजमहल बनवाओगे।’ आशिक … more →

Tags: abhivyakti, aducation, अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य चिंतन

हिन्दी लेखन में अध्यात्मिकता का पुट होना आवश्यक-हिन्दी चिन्तन1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: हिंदी भाषा की चर्चा अक्सर विवादों के कारण अधिक होती है। विवाद यही कि हिंदी थोपी जा रही है या हिंदी व … more →

Tags: abhivyakti, arebic, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आध्यात्म, आलेख, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भय का शासन

हिन्दू धर्म संदेश-सदगुणों से ही आयु बढ़ती है (sadgun aur ayu-hindu dharm sandesh)

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: अपनीतं सुनीतेन योऽयं प्रत्यानिनीषते। मतिमास्थाय सुदृढां तदकापुरुषव्रतम्।। हिंदी में भावार्थ-जो अन्या … more →

Tags: आलेख, अध्यात्म, अभिव्यक्ति, Internet, hindu, bharat, India, सन्देश, अनुभूति

संत कबीर संदेश-भगवान से रूखी रोटी ही मांगता हूं (roti-hindu dharm sandesh)

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: कबीर सांई मुझ को, रूखी रोटी देय। चुपड़ी मांगत मैं डरूं, मत रूखी छिन लेय।। संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते … more →

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चाणक्य संदेश-दूसरे की उन्नति देखकर प्रसन्न होने वाले साधु होते हैं (sadhu svbhav-chankya niti

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: हस्ती अंकुशमात्रेण वाजी हस्तेन ताडयते। श्रृङगी लगुडहस्तेन खङगहस्तेन दुर्जनः।। हिंदी में भावार्थ-जिस … more →

Tags: आध्यात्म, आलेख, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, दृष्टिकोण, मस्तराम, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika

पहचान के लिए परेशान पूरा ज़माना-हिन्दी चिंतन और कविता (trouble of identity-hindi article and poem)

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: प्राकृतिक का नियम है परिवर्तन! दिन हुआ है तो रात भी होगी। सूरज उगा है तो जरूर डूबेगा। धूप है तो अंधे … more →

Tags: arebic, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आध्यात्म, आलेख, आस्था, कला, चिन्तन, दीपक भारतदीप

आदमी और अहसास-हिन्दी चिंतन और कविता (admi aur ahsas-hindi lekh aur kaivta)

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: आदमी अपनी जिंदगी को अपने नज़रिये से जीना चाहता है पर जिंदगी का अपना फलासफा है। आदमी अपनी सोच के अनुसा … more →

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जिंदगी और जंग-हिंदी शायरी (zindagi aur zang-hindi shayri4 comments

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: सच कहते हैं जिंदगी के फैसले कभी जंग से नहीं होते। पर्दे के पीछे तय हो जाते फैसले ले देकर कटवाते है व … more →

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हमदर्दी जताने में कमाई-हिन्दी क्षणिका

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: हमदर्दी जताने की कला हमें कभी नहीं आई किसी का दर्द देखकर मन रोया मन भर आंसु पर आंखें दरिया न बन पाई। … more →

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विदुर नीति-अर्थ प्राप्ति के लिए धर्म का पालन करें (arth aur dharm-hindu adhyamik sandesh)

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: यस्यात्मा विरतः पापाद कल्याणे च निवेशितः। तेन स्र्वमिदं बुद्धम् प्रकृतिर्विकृतिश्चय वा।। हिंदी में भ … more →

Tags: आलेख, संपादकीय, अध्यात्म, अभिव्यक्ति, jagran, editoriyal, dharm, bharat, India

शरीर और मन से विकार निकालने का सबसे अच्छा उपाय है योग साधना (yogsadhna-hindi lekh)

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: अक्सर लोग योग साधना को केवल योगासन तक ही सीमित मानकर उसका विचार करते हैं। जबकि इसके आठ अंग हैं। योगा … more →

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पिटने का व्यापार-हिन्दी व्यंग्य (pitne ka vyapar-hindi vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: एक चीनी ने अपना ऐसा धंधा प्रारंभ किया है जो यकीनन अनोखा है। ऐसा अनोखा धंधा तो कोई दूसरा हो ही नहीं स … more →

Tags: अभिव्यक्ति, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, हास्य व्यंग्य, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Deepak bapu

मानवाधिकार-व्यंग्य आलेख (manvadhikar-vyanyga chittan)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: वर्तमान भौतिकवादी युग में यह मानना ही बेवकूफी है कि कोई बिना मतलब के जनसेवा करता है। अगर लाभ न हो तो … more →

Tags: अध्यात्म, अभिव्यक्ति, अर्थशास्त्र, कला, मस्तराम, समाज, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी, हिन्दी शेर


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