अक्सर लोग योग साधना को केवल योगासन तक ही सीमित मानकर उसका विचार करते हैं। जबकि इसके आठ अंग हैं। योगांगानुष्ठानादशुद्धिये ज्ञानदीप्तिराविवेकख्यातेः।। हिंदी में भावार्थ-योग के आठ अंग-यम, नियम, आसन, प्रा… more →
*** दीपक भारतदीप की हिंदी सरिता-पत्रिका*** mastram Deepak Bharatdeep ki hindi patrika***दीपक भारतदीप wrote 6 days ago: जो तुम भी चाहोगे इंसानी बुत बनकर बड़े कहलाओगे। सीख लो नटों के इशारों की डोर पर नाचना जमाने में … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 days ago: अशिक्षितनयः सिंहो हन्तीम केवलं बलात्। तच्च धीरो नरस्तेषां शतानि जतिमांजयेत्।। हिंदी में भावार्थ-सिंह … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 days ago: कुमिकीटवधोहत्या मद्यानुगतभोजनम्। फलेन्धनकुसुमस्तयमधैर्य च मलावहम्।। हिंदी में भावार्थ-कोई भी मनुष्य … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 days ago: मासांहारी मानवा, परतछ राछस जान। ताकी संगति मति करै, होय भक्ति में हान।। संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: धर्म बन गयी है शय बेचा जाता है इसे बाज़ार में, सबसे बड़े सौदागर पीर कहलाते हैं. भूख, गरीबी, बे … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: सच कहते हैं जिंदगी के फैसले कभी जंग से नहीं होते। पर्दे के पीछे तय हो जाते फैसले ले देकर कटवाते है व … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: माशुका ने पूछा आशिक से ‘अगर शादी के बाद मैं मर गयी तो क्या मेरी याद में ताजमहल बनवाओगे।’ आशिक … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: हिंदी भाषा की चर्चा अक्सर विवादों के कारण अधिक होती है। विवाद यही कि हिंदी थोपी जा रही है या हिंदी व … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: अपनीतं सुनीतेन योऽयं प्रत्यानिनीषते। मतिमास्थाय सुदृढां तदकापुरुषव्रतम्।। हिंदी में भावार्थ-जो अन्या … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: कबीर सांई मुझ को, रूखी रोटी देय। चुपड़ी मांगत मैं डरूं, मत रूखी छिन लेय।। संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: हस्ती अंकुशमात्रेण वाजी हस्तेन ताडयते। श्रृङगी लगुडहस्तेन खङगहस्तेन दुर्जनः।। हिंदी में भावार्थ-जिस … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: प्राकृतिक का नियम है परिवर्तन! दिन हुआ है तो रात भी होगी। सूरज उगा है तो जरूर डूबेगा। धूप है तो अंधे … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: आदमी अपनी जिंदगी को अपने नज़रिये से जीना चाहता है पर जिंदगी का अपना फलासफा है। आदमी अपनी सोच के अनुसा … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: सच कहते हैं जिंदगी के फैसले कभी जंग से नहीं होते। पर्दे के पीछे तय हो जाते फैसले ले देकर कटवाते है व … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: हमदर्दी जताने की कला हमें कभी नहीं आई किसी का दर्द देखकर मन रोया मन भर आंसु पर आंखें दरिया न बन पाई। … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: यस्यात्मा विरतः पापाद कल्याणे च निवेशितः। तेन स्र्वमिदं बुद्धम् प्रकृतिर्विकृतिश्चय वा।। हिंदी में भ … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: अक्सर लोग योग साधना को केवल योगासन तक ही सीमित मानकर उसका विचार करते हैं। जबकि इसके आठ अंग हैं। योगा … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: एक चीनी ने अपना ऐसा धंधा प्रारंभ किया है जो यकीनन अनोखा है। ऐसा अनोखा धंधा तो कोई दूसरा हो ही नहीं स … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: वर्तमान भौतिकवादी युग में यह मानना ही बेवकूफी है कि कोई बिना मतलब के जनसेवा करता है। अगर लाभ न हो तो … more →