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रहीम के दोहे-अमीर को पैसा देने के लिए सब तैयार,गरीब से इंकार (rahim ke dohe)

दीपक भारतदीप wrote 11 hours ago: संतत संपति जानि कै, सबको सब कुछ देत दीन बंधु बिन दीन की, कौ रहीम सुधि लेत कविवर रहीम कहते हैं कि जिन … more →

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विदुर नीति-कम ताकत के होते गुस्सा करना तकलीफदेह

दीपक भारतदीप wrote 3 days ago: द्वावेव न विराजेते विपरीतेन कर्मणा। गृहस्थश्च निरारम्भः कार्यवांश्चैव भिक्षुकः।। हिंदी में भावार्थ-न … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, कला, मस्तराम, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging

संत कबीर वाणी-मूर्ख लोग सभी की पीड़ा एक समान नहीं मानते

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: पीर सबन की एकसी, मूरख जाने नांहि अपना गला कटाक्ष के , भिस्त बसै क्यौं नांहि संत शिरोमणि कबीरदास जी क … more →

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कौटिल्य का अर्थशास्त्र-घमंड से शुरू काम की नाकामी से व्यर्थ का तनाव होता है

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: प्रारब्धानि यथाशास्त्रं कार्याण्यासनबुद्धिभिः। बनानीय मनोहारि प्रयच्छन्त्यचिसत्फलम्।। हिंदी में भावा … more →

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श्री गुरुवाणी-सत्संग से विचार निर्मल होते हैं

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: ‘जो जो कथै सुनै हरि कीरतन ता की दुरमति नासु।’ सगन मनोरथ पावै नानक पूरन होवै आसु।।’’ हिंदी में भावार् … more →

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विदुर नीति-जैसे दिल में ख्याल होते हैं वैसे ही बनता है नज़रिया

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: द्वेषो न साधुर्भवति न मेधावी न पण्डित। प्रिये शुभानि कार्याणि द्वेष्ये पापानि चैव ह।। हिंदी में भावा … more →

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मनु स्मृति: अपने उपभोग से पहले दान करें

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: यानाश्य्यासनान्यस्य, कूपोद्यान ग्रह्यणि च। अदत्तान्युपयु´्जानः एनसः स्वात्तुरीभाक्।। हिंदी में भावार … more →

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मनुस्मृति:आयु,सफ़ेद बाल और धन से ज्ञान और आचरण का महत्त्व

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: मनु महाराज कहते है कि ————— न हायनैर्न पालितैर्न वित्तेन न बंधुभिः । ऋ … more →

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संत कबीर वाणीः अच्छा खाने को मिले तो भी बेवकूफ की संगत न करें

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: कबीर संगत साधु की, जौ की भूसी खाय खीर खीड भोजन मिलै, साकट संग न जाय संत कबीर दास जी कहते हैं कि साधु … more →

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मनुस्मृतिः हिंसा से कोई भी उद्देश्य पूरा नहीं होता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: नाऽकृत्वा प्राणिनां हिंसां मांसमुत्यद्यते क्वचित्। न च प्राणिवधः स्वग्र्यस्तस्मान्मांसं विवर्जयेत्।। … more →

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संत कबीरदास के दोहे-भगवान के साथ चतुराई मत करो

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सिहों के लेहैंड नहीं, हंसों की नहीं पांत लालों की नहीं बोरियां, साथ चलै न जमात संत शिरोमणि कबीर दास … more →

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चाणक्य नीतिः महल पर बैठने से कौआ गरुड़ नहीं हो जाता।

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: न निर्मितः केन न दृष्टपूर्वः न श्रूयते हेममयः कुरंगः। तथापि तृष्णा रघुनंदनस्य विनाशकाले विपरीत बुद्ध … more →

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रहीम संदेश: समय ख़राब हो तो कटु वचन सुनने पड़ते हैं1 comment

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: समय परे ओछे बचन, सब के सहे रहीम सभा दुसासन पट गहे, गदा लिए रहे भीम कविवर रहीम कहते हैं कि बुरा समय आ … more →

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रहीम के दोहे:राम का नाम जपने वालों को विषय नहीं घेरते

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: रहिमन राम न उर धरै, रहत विषय लपटाय पसु खर खात सवाद सों, गुर बुलियाए खाय कविवर रहीम कहते है कि भगवान … more →

Tags: Hindi Education, Hindu darshan, Hindu culture, bharat, hindu dharm, web duniya, hindi media, hindi megzine, bhagvan shri ram

मदारी-2

दरभंगिया wrote 3 months ago: मदारी: जमूरे! जमूरा: हाँ उस्ताद. मदारी: खेल दिखायेगा? जमूरा: सच्चा की झूठा? मदारी: झूठा तो बहुत देखा … more →

Tags: हास्य व्यंग्य, हिन्दी, चुनाव, प्रहसन, मशखरी, Funny, hindi

अन्धविश्वास ने धर्म के प्रति विश्वास को कमजोर किया है-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: एक मित्र ब्लाग लेखक सुरेश चिपलूनकर ने कल कुछ फोटो बनारस शहर और गंगा नदी के भेजे। वह हिंदी ब्लागजगत … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिंतन, दीपक भारतदीप, संपादकीय, सन्देश, साहित्य, हिन्दी

अध्यात्म ज्ञान के बिना धर्म को समझना कठिन-चिंत्तन

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: धर्म क्या है यह समझे बिना उसकी आलोचना करना गलत है। किसी भी धार्मिक विद्वान् ने अपने विचार से धर्म क … more →

Tags: हिन्दी, आलेख, चिंतन, संपादकीय, अभिव्यक्ति, jagran, alekh, abhivyakti, adhyatm

संत कबीर संदेशः खोटी मनोवृत्ति के लोगों के सामने अपने रहस्य न खोलें

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: हीरा तहां न खोलिए,जहां खोटी है हाट कसि करि बांधो गठरी, उठि चालो बाट संत शिरोमणि कबीर दास जी कहते हैं … more →

Tags: हिन्दी, abhivyakti, Internet, Kabir, Friends, dharm, dohe, hindu, bharat

अपने को बैचेन कर शान्ति ढूँढने जाते-हिन्दी शायरी 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: चलने को ताज महल भी चल जाता है हिलने को कुतुबमीनार भी हिल जाता है चांद लाकर यहां भेंट किया जाता है त … more →

Tags: अभिव्यक्ति, abhivyakti, Internet, sahity, India, सन्देश, अनुभूति, साहित्य, Deepak bharatdeep


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