सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी, बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी, गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी, दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी। चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पु… more →
पूणॅतया हिन्दी ब्लाग (hindi everything)ssjha wrote 2 years ago: स्क्रॅप कर और भूल जा॥ रीप्लाय की अपेक्षा मत रख॥ किया हुआ स्क्रॅप कभी व्यर्थ नही जाता॥ सबको अपने किये … more →
ssjha wrote 2 years ago: मुसाफ़िर हैं हम तो चले जा रहे हैं बड़ा ही सुहाना ग़ज़ल का सफ़र है। पता पूछते हो तो इतना पता है हमारा … more →
ssjha wrote 3 years ago: सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी, बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी, गुमी हुई आज़ादी की … more →
ssjha wrote 3 years ago: स्वप्न झरे फूल से, मीत चुभे शूल से, लुट गये सिंगार सभी बाग़ के बबूल से, और हम खड़े खड़े बहार देखते रहे … more →