Blogs about: हिन्‍दी

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कल हो ना हो 9 comments

ssjha wrote 2 years ago: आज एक बार फ़िर सुरज को उगता देखो और चान्द को चान्दनी रात मे जागता देखो क्या पता कल ये धरती चान्द और … more →

Tags: कविता, पक्‍ितयॉ, couplets, hindi, Poem

पहली ब्‍लाग10 comments

ssjha wrote 2 years ago: हिऩ्‍दी  मे बहुत दिनो से लिख़ने की कोशिश कर रहा था, किन्‍तु आज मै सफल हो पाया हु| नीचे मै लिन्‍क दे र … more →

Tags: hindi

चाहे दुश्मन ज़माना हमारा 1 comment

ssjha wrote 2 years ago: ने चाहे दुश्मन ज़माना हमारा ! सलामत रहे दोस्ताना हमारा !! ना बिछड़ेंगे मर के भी हम दोस्तों ! हमें दोस् … more →

Tags: Friendship, hindi, Poem, couplets, पक्‍ितयॉ, दोस्‍ती, कविता

स्क्रॅप कर और भूल जा 2 comments

ssjha wrote 2 years ago: स्क्रॅप कर और भूल जा॥ रीप्लाय की अपेक्षा मत रख॥ किया हुआ स्क्रॅप कभी व्यर्थ नही जाता॥ सबको अपने किये … more →

Tags: बकर, मस्‍ती, हिन्‍दी भण्‍ङार, Bakar, hindi, masti

एक ऐसा गीत गाना चाह्ता हूं...3 comments

ssjha wrote 2 years ago: एक ऐसा गीत गाना चाह्ता हूं, मैं.. खुशी हो या गम, बस मुस्कुराना चाह्ता हूं, मैं.. दोस्तॊं से दोस्ती त … more →

Tags: कविता, hindi, Poem

दोस्ती नाम नहीं सिर्फ़ दोस्तों के साथ रेहने का

ssjha wrote 2 years ago: दोस्ती नाम नहीं सिर्फ़ दोस्तों के साथ रेहने का.. बल्कि दोस्त ही जिन्दगी बन जाते हैं, दोस्ती में.. जरु … more →

Tags: Friendship, hindi, Poem, दोस्‍ती, कविता

मैं और मेरा रूममेट अक्सर ये बातें करते हैं,

ssjha wrote 2 years ago: मैं और मेरा रूममेट अक्सर ये बातें करते हैं, घर साफ होता तो कैसा होता. मैं किचन साफ करता तुम बाथरूम ध … more →

Tags: masti, Friendship, hindi, Poem, Bakar, couplets, बकर, पक्‍ितयॉ, दोस्‍ती

किस कर में यह वीणा धर दूँ?

ssjha wrote 2 years ago: देवों ने था जिसे बनाया, देवों ने था जिसे बजाया, मानव के हाथों में कैसे इसको आज समर्पित कर दूँ? किस क … more →

Tags: कविता, Ghazal, Harivansh Rai Bachchan, hindi, Poem

मुसाफ़िर हैं हम तो

ssjha wrote 2 years ago: मुसाफ़िर हैं हम तो चले जा रहे हैं बड़ा ही सुहाना ग़ज़ल का सफ़र है। पता पूछते हो तो इतना पता है हमारा … more →

Tags: गजल, हिन्‍दी भण्‍ङार, Ghazal, hindi

झाँसी की रानी 1 comment

ssjha wrote 3 years ago: सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी, बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी, गुमी हुई आज़ादी की … more →

Tags: कविता, परभावित, हिन्‍दी भण्‍ङार, Inspiration, Poem

कारवाँ गुज़र गया

ssjha wrote 3 years ago: स्वप्न झरे फूल से, मीत चुभे शूल से, लुट गये सिंगार सभी बाग़ के बबूल से, और हम खड़े खड़े बहार देखते रहे … more →

Tags: hindi, Poem, हिन्‍दी भण्‍ङार, कविता


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