आज एक बार फ़िर सुरज को उगता देखो और चान्द को चान्दनी रात मे जागता देखो क्या पता कल ये धरती चान्द और सुरज हो ना हो आज एक बार सबसे मुस्करा के बात करो बिताये हुये पलों को साथ साथ याद करो क्या पता कल चेह… more →
पूणॅतया हिन्दी ब्लाग (hindi everything)ssjha wrote 2 years ago: आज एक बार फ़िर सुरज को उगता देखो और चान्द को चान्दनी रात मे जागता देखो क्या पता कल ये धरती चान्द और … more →
ssjha wrote 2 years ago: हिऩ्दी मे बहुत दिनो से लिख़ने की कोशिश कर रहा था, किन्तु आज मै सफल हो पाया हु| नीचे मै लिन्क दे र … more →
ssjha wrote 2 years ago: ने चाहे दुश्मन ज़माना हमारा ! सलामत रहे दोस्ताना हमारा !! ना बिछड़ेंगे मर के भी हम दोस्तों ! हमें दोस् … more →
ssjha wrote 2 years ago: स्क्रॅप कर और भूल जा॥ रीप्लाय की अपेक्षा मत रख॥ किया हुआ स्क्रॅप कभी व्यर्थ नही जाता॥ सबको अपने किये … more →
ssjha wrote 2 years ago: एक ऐसा गीत गाना चाह्ता हूं, मैं.. खुशी हो या गम, बस मुस्कुराना चाह्ता हूं, मैं.. दोस्तॊं से दोस्ती त … more →
ssjha wrote 2 years ago: दोस्ती नाम नहीं सिर्फ़ दोस्तों के साथ रेहने का.. बल्कि दोस्त ही जिन्दगी बन जाते हैं, दोस्ती में.. जरु … more →
ssjha wrote 2 years ago: मैं और मेरा रूममेट अक्सर ये बातें करते हैं, घर साफ होता तो कैसा होता. मैं किचन साफ करता तुम बाथरूम ध … more →
ssjha wrote 2 years ago: देवों ने था जिसे बनाया, देवों ने था जिसे बजाया, मानव के हाथों में कैसे इसको आज समर्पित कर दूँ? किस क … more →
ssjha wrote 2 years ago: मुसाफ़िर हैं हम तो चले जा रहे हैं बड़ा ही सुहाना ग़ज़ल का सफ़र है। पता पूछते हो तो इतना पता है हमारा … more →
ssjha wrote 3 years ago: सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी, बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी, गुमी हुई आज़ादी की … more →
ssjha wrote 3 years ago: स्वप्न झरे फूल से, मीत चुभे शूल से, लुट गये सिंगार सभी बाग़ के बबूल से, और हम खड़े खड़े बहार देखते रहे … more →