( अति मह्त्वाकांक्षी लोग… क्या क्या गुल खिलाती हैं उनकी हीन ग्रन्थियां…) पिकनिक पॉइन्ट पर खड़ा मैं देख रहा ढलकता पानी जलधारा का मैं छूना चाहता झिझकती उंगलियों से टपकती करूणा इन बूंदों से गिरती खाइय… more →
हरिहर झाHarihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: ( अति मह्त्वाकांक्षी लोग… क्या क्या गुल खिलाती हैं उनकी हीन ग्रन्थियां…) पिकनिक पॉइन्ट पर खड़ा मै … more →