रास्तों पे सब ही पहचाने से लोग हैं देखो करीब से तो अंजाने से लोग हैं दिल में झांकोगे तो बस तन्हाईयां ही हैं महफ़िल सजी है फिर भी वीराने से लोग हैं करते हैं इश्क़ जानकर अंजाम इश्क़ का नासमझ से लोग दीवाने … more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: रास्तों पे सब ही पहचाने से लोग हैं देखो करीब से तो अंजाने से लोग हैं दिल में झांकोगे तो बस तन्हाईयां … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: एक पल में ही हज़ारों मुद्दतों की बात हो ज़हन में जो ले रहीं उन करवटों की बात हो आओ बोलें प्यार के इख़ला … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: ड़ूबनेवाले को इक ही तिनके का सहारा काफ़ी है समझदार को कहते हैं बस एक इशारा काफ़ी है यूँ ही नहीं कहता हू … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: मेरी ज़बां से मेरा ही अफ़साना बिखरा ढ़ूँढ़ो कहां जाने ये दिल दीवाना बिखरा नाकाम मै है इस से भी ग़ारत नहीं … more →