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रास्तों पे सब ही पहचाने से लोग हैं4 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: रास्तों पे सब ही पहचाने से लोग हैं देखो करीब से तो अंजाने से लोग हैं दिल में झांकोगे तो बस तन्हाईयां … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Sep 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

एक पल में ही हज़ारों मुद्दतों की बात हो1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: एक पल में ही हज़ारों मुद्दतों की बात हो ज़हन में जो ले रहीं उन करवटों की बात हो आओ बोलें प्यार के इख़ला … more →

Tags: 2008 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, Feb 2008, 2008, एक, कविता, की, गज़ल, जैन

ड़ूबनेवाले को इक ही तिनके का सहारा काफ़ी है

Rohit Jain wrote 1 year ago: ड़ूबनेवाले को इक ही तिनके का सहारा काफ़ी है समझदार को कहते हैं बस एक इशारा काफ़ी है यूँ ही नहीं कहता हू … more →

Tags: 2008 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, Jan 2008, 2008, इक, कविता, का, काफ़ी, को

मेरी ज़बां से मेरा ही अफ़साना बिखरा1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: मेरी ज़बां से मेरा ही अफ़साना बिखरा ढ़ूँढ़ो कहां जाने ये दिल दीवाना बिखरा नाकाम मै है इस से भी ग़ारत नहीं … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, Dec 2007, 2007, अफ़साना, कविता, गज़ल, जैन, बिखरा


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