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Blogs about: हूँ

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दास्तां लिख रहा हूँ पानी पर5 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: हार जाने की कामरानी पर                दास्तां लिख रहा हूँ पानी पर आपने दिल मेरा जो तोड़ा है शुक्र करत … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Nov 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

मै दिल की दीवारों से निकल आया हूँ7 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: मै दिल की दीवारों से निकल आया हूँ मै ग़म के नज़ारों से निकल आया हूँ मुजरिमों कि क़तारों से निकल आया हूँ … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Oct 2008, की, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

हूँ चल रहा उस राह पर जिसकी कोई मंज़िल नहीं

Rohit Jain wrote 1 year ago: हूँ चल रहा उस राह पर जिसकी कोई मंज़िल नहीं है जुस्तजू उस शख़्स की जो कभी हासिल नहीं वहम जाने ये मेरे इ … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, NOV 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

कमज़ोर मै नहीं हूँ जंगों का दिल नहीं है

Rohit Jain wrote 1 year ago: कमज़ोर मै नहीं हूँ जंगों का दिल नहीं है देखा नहीं है जाता हारा हुआ ज़माना रखता है लाज देखो गुमराहियों … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, May 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

मस्जिदों में भी साक़ी का नाम लेता हूँ

Rohit Jain wrote 1 year ago: मस्जिदों में भी साक़ी का नाम लेता हूँ वूज़ू के वास्ते हाथों में जाम लेता हूँ नशा कराके तो सब ही गिराया … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Mar 2007, में, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

क़तरा क़तरा पिघल रहा हूँ

Rohit Jain wrote 1 year ago: क़तरा क़तरा पिघल रहा हूँ तेरी आँच में मै जल रहा हूँ सहमा सहमा और धीरे धीरे बर्फ़ की मानिंद गल रहा हूँ अ … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, JAN 2007, 2007, कविता, गज़ल, जैन, पिघल, रहा


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