हार जाने की कामरानी पर दास्तां लिख रहा हूँ पानी पर आपने दिल मेरा जो तोड़ा है शुक्र करता हूँ मेहरबानी पर कुछ निशां देखता हूँ मै अपने आपकी बेनिशां निशानी पर लुत्फ़ क्या क्या मिला है क्या बो… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: हार जाने की कामरानी पर दास्तां लिख रहा हूँ पानी पर आपने दिल मेरा जो तोड़ा है शुक्र करत … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: मै दिल की दीवारों से निकल आया हूँ मै ग़म के नज़ारों से निकल आया हूँ मुजरिमों कि क़तारों से निकल आया हूँ … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: हूँ चल रहा उस राह पर जिसकी कोई मंज़िल नहीं है जुस्तजू उस शख़्स की जो कभी हासिल नहीं वहम जाने ये मेरे इ … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: कमज़ोर मै नहीं हूँ जंगों का दिल नहीं है देखा नहीं है जाता हारा हुआ ज़माना रखता है लाज देखो गुमराहियों … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: मस्जिदों में भी साक़ी का नाम लेता हूँ वूज़ू के वास्ते हाथों में जाम लेता हूँ नशा कराके तो सब ही गिराया … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: क़तरा क़तरा पिघल रहा हूँ तेरी आँच में मै जल रहा हूँ सहमा सहमा और धीरे धीरे बर्फ़ की मानिंद गल रहा हूँ अ … more →