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आप भी अजीब हैं3 comments

Rohit Jain wrote 9 months ago: आप भी अजीब हैं क्यूँ मेरे करीब हैं देते हैं दवा में ज़हर ये मेरे तबीब हैं                  तबीब == He … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Sep 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

और भी काम हैं ज़माने में3 comments

Rohit Jain wrote 10 months ago: बहुत दिनों से ग़ैरहाज़िर हूँ जिसके लिये माफ़ीगुज़ार हूँ. अपनी हालत बयां करने के लिये एक फ़ैज़ साहब का शेर … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Sep 2008, में, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

रास्तों पे सब ही पहचाने से लोग हैं4 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: रास्तों पे सब ही पहचाने से लोग हैं देखो करीब से तो अंजाने से लोग हैं दिल में झांकोगे तो बस तन्हाईयां … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Sep 2007, ही, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

खुशबू जैसे सब रिश्ते हैं6 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: खुशबू जैसे सब रिश्ते हैं, जितना थामूं उड़ जाते हैं इन रस्तों में कुछ गड़बड़ है, उसकी जानिब मुड़ जाते हैं … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Feb 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

सब्र हम यूँ इख़्तियार करते हैं1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: सब्र हम यूँ इख़्तियार करते हैं होता नहीं है बेक़ार करते हैं हमको मालूम है वो है बेवफ़ा फिर भी हम ऐतबार … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Feb 2008, एक, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

काटे हैं इन्सान ने दिल की रगों से खंजर कई

Rohit Jain wrote 1 year ago: काटे हैं इन्सान ने दिल की रगों से खंजर कई दिल की हिम्मत से सुनो झुक जाते हैं लश्कर कई ये जो मतलबी जह … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Jan 2008, की, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

चले हैं आज ज़माने को आज़माये हुए

Rohit Jain wrote 1 year ago: चले हैं आज ज़माने को आज़माये हुए ये देखो खून में अपने ही हम नहाये हुए न जाने मुझको हुआ कौन सा मक़ाम हास … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, NOV 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

इन्सां भी हो गये हैं ख़ुदा आज दोस्तों

Rohit Jain wrote 1 year ago: इन्सां भी हो गये हैं ख़ुदा आज दोस्तों ये है मोहब्बत का सिला आज दोस्तों ना इश्क़ ना इख़लास ना उम्मीद ना … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Sep 2007, हो, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

हौंसले ख़्वाब हैं फ़ासिले ख़्वाब हैं1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: हौंसले ख़्वाब हैं फ़ासिले ख़्वाब हैं मोहब्बत के ये सिलसिले ख़्वाब हैं आँखें हैं हैरां है दिल भी परेशां क … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Aug 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

दिल में अजब से ख़यालात हैं

Rohit Jain wrote 1 year ago: दिल में अजब से ख़यालात हैं आज उनसे पहली मुलाक़ात है ज़ुल्फ़ें जो बिखरीं तो फ़िर क्या कहें लगा दिन में जैस … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Mar 2007, में, दिल, से, अजब, ख़यालात

हुस्न पर हर पल नये जमाल रहते हैं

Rohit Jain wrote 1 year ago: हुस्न पर हर पल नये जमाल रहते हैं चेहरे पे हर मिजाज़ के विसाल रहते हैं मिलने की आरज़ू में और मिलने के ब … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Mar 2007, पल, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

मंज़िलें दिखती नहीं बस छा रहीं हैं दूरियाँ

Rohit Jain wrote 1 year ago: मंज़िलें दिखती नहीं बस छा रहीं हैं दूरियाँ रास्ते मुश्किल किये पास आ रहीं हैं दूरियाँ हर क़दम पर बिछ र … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Feb 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain


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